, July 28 -- गौरतलब है कि अपराध पर अंकुश लगाने को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया है कि बिहार में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है। महिला अपराध के मामले में तत्काल केस दर्ज कर, तुरंत चार्जशीट दाखिल की जाए और कोर्ट के माध्यम से अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाई जाए।आमजनों में कानूनी प्रावधानों के प्रचार-प्रसार के लिये एनजीओ के सहयोग से 'नया सवेरा अभियान 3.0' के तहत 18 जुलाई 2026 से 25 जुलाई 2026 तक स्थानीय स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य बाल अपराधों, मानव तस्करी और बाल श्रम जैसी गंभीर सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लोगों को शिक्षित करना है।

विशेष अभियान में 10,589 गुमशुदा बच्चों की जानकारी मिशन वत्सल्य पोर्टल पर अपलोड करवाई गई है। जून 2026 में मिले 209 मामलों में से अब तक 32 बच्चों को बरामद किया गया है।

राज्य में हॉटस्पॉट चिन्हित कर थाना स्तर पर कुल 1005 पुलिस दीदी (अभया ब्रिगेड) टीमें बनाई गई हैं, इन टीमों ने 612 मनचलों के खिलाफ कार्रवाई कर 20 मामलों की रिपोर्ट दर्ज करवाई है।

महिला छात्रावासों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 355 निजी महिला छात्रावास को चिन्हित कर संचालकों को तुरंत पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं। जिन छात्रावासों में सुरक्षा उपाय नहीं हैं, वहां तुरंत सीसीटीवी , बायोमेट्रिक और आगंतुक रजिस्टर लगाने के आदेश दिए गए हैं।

बिहार पुलिस ने आरोपपत्र मामलों की सूची टीएमएस पोर्टल पर अपलोड कर अदालत की कार्रवाई की निगरानी शुरू की है, अब तक 668 कांड दर्ज किए गए हैं। जून 2026 में बलात्कार के 30 मामलों में 35 आरोपियों और पॉक्सो के 27 मामलों में 30 आरोपियों को दोषी ठहराकर सजा दी गई।

वहीं मई/जून महीने में विशेष अभियान चलाकर महिलाओं के विरूद्ध अपराध से संबंधित मामलों में कुल 67 अभियुक्तों की गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।

सुरक्षा केवल कानून लागू करने का नाम नहीं है, बल्कि समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति तक न्याय, गरिमा और संरक्षण पहुंचाने का भी नाम है। इसी उद्देश्य से समाज के सबसे संवेदनशील और पिछड़े वर्गों के प्रति बिहार पुलिस की नई नीतियां और मुहिम तेजी से लागू की जा रही हैं, ताकि वे संरक्षण और सामाजिक न्याय से वंचित न रहें।

मई जून महीने में विशेष अभियान में अनुसूचित जाति/जनजाति से जुड़े 74 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण विभाग के अनुसार 01 अप्रैल से 15 जुलाई 2026 के बीच प्राथमिकी के आधार पर 2502 और आरोपपत्र के आधार पर 1580 लोगों को मुआवजा दिया गया। पुलिस मुख्यालय में सभी जिलों के एसपी और अपराध प्रबोधकों की बैठक कर मामलों के त्वरित निपटारे और लंबित मामलों की संख्या घटाने के निर्देश दिए गए।

मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017 की धारा-100 के तहत थाना स्तर पर भटकते हुए मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को संरक्षण में लेकर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचाने का निर्देश सभी जिलों को दिया गया है। इस वर्ष "बिहार राज्य मानसिक स्वास्थ्य एवं सहबद्ध संस्थान", कोईलवर, आरा में उपचार के बाद 55 लोग ठीक होकर अपने परिवार या हाफवे होम भेजे जा चुके हैं।

अपराध अनुसंधान विभाग एवं कमजोर वर्ग प्रभाग के अपर पुलिस महानिदेशक श्रीमती के.सुहिता अनुपम ने बताया कि,यह एक बहु-आयामी मॉडल के रूप में तैयार किया गया है जिसमें प्रवर्तन, सहयोग, पुनर्वास और जन जागरण के चार स्तंभ शामिल हैं। अभियान के तहत विशेष रूप से संवेदनशील जिलों में अभियान फील्ड टीमें, मोबाइल रैपिड रिस्पांस यूनिट और अलग-अलग विभागों के समन्वय से तेजी से कार्रवाई की जा रही है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित