, June 16 -- श्री राम ने कहा कि मत्स्य बाजारों में स्वच्छता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अब तक 6,449 वाहन एवं 12,172 मत्स्य विपणन किट का वितरण किया जा चुका है। 'मुख्यमंत्री मत्स्य विपणन योजना' के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य के चिह्नित 3 प्रखंडों व 7 पंचायतों में आधुनिक मत्स्य बाजारों का निर्माण किया जा रहा है। कृषि विभाग की तरह मछली पालकों को रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है। वहीं इस मौके पर डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि मछली पालन को बिज़नेस की तरह विकसित करने की जरूरत है। इस क्षेत्र में निर्यात की असीम संभावनाएं हैं। हम निर्यात बढ़ाकर मछली पालकों की आय बढ़ा सकते हैं। इसके लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें प्रोसेसिंग प्लांट लगाना, फिश फ़ीड मिल लगाना और आरएएस या बायोफ्लॉक इत्यादि से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य में एनएफडीबी का कार्यालय खुल चुका है, इससे राज्य में मछली उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। जब तक उत्पादन सरप्लस नहीं होगा, तब तक दूसरे राज्यों को निर्यात नहीं कर सकते।
इस मौके पर एनएफडीबी के मुख्य कार्यपालक विजय कुमार बेहरा और विभाग के मत्स्य निदेशक तुषार सिंगला ने भी अपनी बात रखी। कार्यक्रम में विभाग के संयुक्त सचिव कुमार रविंद्र, एनसीडीसी के क्षेत्रीय निदेशक अनिरुद्ध सिंह, नाबार्ड के जीएम पार्थ मंडल सहित बड़ी संख्या में राज्यभर से आए मत्स्य किसान मौजूद थे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित