, March 13 -- सड़क दुर्घटना में मृत्यु दर में 10 फीसदी की कमी, इस मानक के लिए 10 अंक रखे गए हैं। इसी तरह सड़क दुर्घटना के कांड़ों का वैज्ञानिक अनुसंधान और मुआवजा भुगतान में 15 अंक, यातायात बल में रिक्ति का भरा जाना (10 अंक), ट्रेनिंग के लिए 05 अंक, प्रभावी प्रवर्तन मद में 20 अंक, चोक प्वाइंट से निजात दिलाने के लिए 5 अंक, आई-रैड या ई-डीएआर में डाटा अपलोड करने में 05 अंक, आई-आरएडी या ई-डीएआर दुर्घटना आधारित डाटा अपलोड करने में 05 अंक, एफओ स्तर पर पूर्ण करने में 05 अंक तथा जन संचार और जागरूकता फैलाने के लिए 10 अंक निर्धारित किए गए हैं।

सभी जिलों और शहरों में चोक प्वाइंट हटाना ट्रैफिक महकमा के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है लेकिन इसे हटाने में किसी जिले ने बहुत अधिक रूचि नहीं दिखाई है। इसलिए सभी जिलों को इस मानक के अंतर्गत 05 में शून्य अंक मिले हैं। इसके अलावा ट्रैफिक को लेकर आम लोगों के बीच संचार और जागरूकता फैलाने में भी जिलों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। अधिकांश जिलों को शून्य या दशमलव में अंक मिले हैं। दो-तीन जिलों को एक या डेढ़ के आसपास अंक मिले हैं। सिर्फ एक जिला कटिहार को सबसे ज्यादा 2.4 अंक मिले हैं। मुजफ्फरपुर को 1.6, समस्तीपुर को 1.2, गया को एक अंक मिले हैं। अन्य जिलों को एक से कम या शून्य अंक मिले हैं।

ट्रैफिक की इस व्यवस्था को लागू करने से पहले सभी जिलों में तैनात ट्रैफिक महकमा के पदाधिकारियों से लेकर सभी स्तर से पुलिस कर्मियों को समुचित ट्रेनिंग दी गई है। इसके लिए तैयार एक्शन प्लान से जुड़े सभी मानकों और इनके तथ्यों की जानकारी दी गई है। इस वजह से इस मद में सभी जिलों को 05 में 05 अंक मिले हैं। सड़क दुर्घटना में मृत्यु की दर को कम करने में कुछ जिलों का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है, जिसमें पूर्णिया, सारण, लखीसराय, अररिया, खगड़िया, पूर्वी चंपारण, अरवल, खगड़िया समेत अन्य शामिल हैं।

अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) : ट्रैफिक सुधांशू कुमार ने बताया कि जिन जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है। पीछे रहने वाले जिलों को प्रदर्शन सुधारने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिलों को बेहतर करने की होड़ करने के लिए सड़क सुरक्षा, यातायात व्यवस्था एवं नियंत्रण को बेहतर करने पर खासतौर से फोकस करना होगा। इस तरह की कवायद राज्य की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने में काफी मददगार साबित हो सकती है। राजधानी पटना समेत सभी प्रमुख शहरों में खासतौर से ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए व्यापक स्तर पर पहल की जा रही है।

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