, Oct. 25 -- महिलाओं को जरूरत के अनुसार बेहतर कानूनी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए पटना स्थित चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (सीएनएलयू) में भी सहायता केंद्र स्थापित किया गया है। यहां महिलाओं की शिकायतों, हिंसा और उत्पीड़न से जुड़े मामलों में कानूनी सलाह एवं आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। दीदी अधिकार केंद्रों के दायरे को और व्यापक बनाने की तैयारी है। विभागीय योजना के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026 के अंत तक इन केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 421 करने का लक्ष्य है। इसके तहत अधिक से अधिक प्रखंडों की ग्रामीण महिलाओं तक सहायता सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा।

इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को परामर्श देने, आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने तथा राशन कार्ड, पेंशन, आधार, वीबी-जी राम जी, आवास और दिव्यांगजन कल्याण से संबंधित योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में सहयोग दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जानकारी के अभाव, दस्तावेजी कठिनाइयों या अन्य बाधाओं के कारण कोई भी पात्र महिला सरकारी सुविधाओं से वंचित न रहे।

दीदी अधिकार केंद्रों की यह पहल ग्रामीण महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाने, कठिन परिस्थितियों में सहायता उपलब्ध कराने और उन्हें सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

ग्रामीण विकास और सूचना एवं जन-संपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने कहा,"महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और सरकारी सुविधाओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना सशक्त एवं समावेशी बिहार के निर्माण के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में शुरू की गई जीविका की पहल ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ-साथ अधिकारों, सुरक्षा और सम्मान के लिए खड़े होने का हौसला दिया है। दीदी अधिकार केंद्र महिलाओं को अपनी समस्याएं रखने, उचित परामर्श प्राप्त करने और न्याय की दिशा में आगे बढ़ने में सहायता कर रहे हैं।

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