, Sept. 8 -- पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष अंशुमान सरकार ने कहा कि विश्वविद्यालय की गिरती शिक्षा व्यवस्था, अधिकारियों और छात्रों के बीच संवाद की कमी तथा छात्रों को विभिन्न सुविधाओं से वंचित रखने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि जिस विश्वविद्यालय की अपनी शानदार भूमिका और गौरवशाली परंपरा रही है, उसकी छवि वर्तमान कुलपति के रवैये से धूमिल हो रही है।इस दौरान एटक के पटना जिला सचिव कौशलेंद्र तथा पूर्व कर्मचारी नेता एवं सीनेट सदस्य रहे कैशर जी ने भी भूख हड़ताल को अपना समर्थन दिया।
इस अवसर पर शंभू जी ने भूख हड़ताल का समर्थन करते हुए कहा कि आज जिस तरह देश में छात्रों और युवाओं की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है तथा पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं, उसी तरह पटना विश्वविद्यालय के कुलपति भी तानाशाही के रास्ते पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों की मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
एआईएसएफ के पटना जिला सचिव मीर सैफ अली ने कहा कि पटना विश्वविद्यालय देश के सातवें सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक है और इसकी अपनी गौरवशाली परंपरा रही है,लेकिन वर्तमान कुलपति के रवैये के कारण विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि एलएलबी प्रवेश परीक्षा रद्द नहीं की गई और पीजी में हुई व्यापक फीस वृद्धि को अविलंब वापस नहीं लिया गया, तो एआईएसएफ विश्वविद्यालय में आंदोलन को और व्यापक करेगा।
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