, May 25 -- एडीजी ने बताया कि क्रि-मैक पोर्टल का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। इसकी मदद से जीरो एफआईआर का आदान- प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ई-साक्ष्य के अंतर्गत वर्तमान में 22 हजार 848 अनुसंधानकर्ताओं में 21 हजार 640 पदाधिकारियों का पंजीकरण किया जा चुका है। सभी पदाधिकारियों को इससे संबंधित समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया गया है। अब तक 3.99 लाख से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जिसमें एक लाख 42 हजार 484 साक्ष्य आईडी बनाई गई है। इसमें 67 हजार 185 एफआईआर से इसे लिंक किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि पुलिस को डिजिटल रूप से सक्षम बनाने के लिए एआई से लेकर सभी नए सॉफ्टवेयर या एप या प्रणाली का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण की यह प्रक्रिया निरंतर जारी है। एडीजी ने कहा कि सिटिजन सर्विस पोर्टल की शुरुआत दिसंबर 2025 में की गई है। इसकी मदद से आम नागरिकों को कई तरह की सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। मसलन, एफआईआर की कॉपी भी कोई इसके माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं, घोषित ईनामी अपराधियों की सूची भी देख सकते हैं, किसी लापता व्यक्ति की अपडेट स्थिति भी इसके जरिए जान सकते हैं। अज्ञात व्यक्ति या शव का विवरण भी इस पर मिल जाता है। इस पोर्टल पर कोई व्यक्ति अपनी पहचान गुप्त रखते हुए कोई अहम सूचना या जानकारी भी पुलिस के साथ साक्षा कर सकते हैं।

एडीजी श्री अजिताभ कुमार ने बताया कि आने वाले समय में पुलिस महकमा प्रीडेक्टिव (अनुमान) पुलिसिंग पर फोकस करने जा रही है। उन्नत सॉफ्टवेयर एवं तकनीकों के अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से अपराध की प्रवृति तय की जा सकती है और अपराध के पैटर्न के आधार पर यह अनुमान लगाया जा सकेगा कि किस तरह की आपराधिक वारदात अब होने वाली है। इससे ऐसी घटनाओं को होने से पहले ही रोका जा सकेगा।

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