, April 13 -- इन ऐतिहासिक जलस्रोतों के सौंदर्यीकरण को लेकर विवाद पिछले कुछ समय से गहराता जा रहा है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि दिग्घी, हराही और गंगासागर तालाब एक साझा वेटलैंड तंत्र का हिस्सा हैं और राज्य वेटलैंड प्राधिकरण के अभिलेखों के अनुसार यह लगभग 1.8 किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर रेस्टोरेंट, जिम और गज़ीबो, प्रसाधन गृह जैसे निर्माण कार्य इस प्राकृतिक तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
हालांकि, जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार ,शहरी विकास एवं आवास विभाग ने तीनों तालाबों के समग्र विकास की जिम्मेदारी बुडको को सौंपी है। इस परियोजना पर करीब 70.34 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि तालाबों को आपस में जोड़ने के लिए 16.52 करोड़ रुपये की अतिरिक्त योजना भी स्वीकृत है। इसके तहत घाट, शौचालय, व्यायाम स्थल, नौकायन सुविधा और प्रकाश व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये तालाब भूजल पुनर्भरण और जैव विविधता के संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत इनमें किसी भी प्रकार के परिवर्तन के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक है।
दरभंगा की पहचान सदियों पुराने इन ऐतिहासिक जलाशयों से जुड़ी रही है, लेकिन समय के साथ अतिक्रमण के कारण इनका क्षेत्रफल सिमटता गया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती ने इस मामले को एक निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। अब अगली सुनवाई में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस मामले में क्या दिशा-निर्देश जारी करती है और विकास व संरक्षण के बीच संतुलन कैसे स्थापित होता है।
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