, Oct. 4 -- स्थापना के बाद से कंपनी ने अभूतपूर्व प्रगति की है। वर्ष 2019-20 में जहां कंपनी से 16,656 महिला सदस्य जुड़ी थीं, वहीं अगस्त 2026 तक यह संख्या बढ़कर 49,344 हो गई है। यानी बीते सात वर्षों में सदस्य संख्या में करीब तीन गुना की वृद्धि हुई है। इसी अवधि में औसत दैनिक दूध संग्रह 11,436 किलोग्राम से बढ़कर 94,180 किलोग्राम के स्तर तक पहुंच गया है। वर्तमान में 479 लाख रुपये की शेयर पूंजी के साथ कंपनी पांच जिलों के 53 प्रखंडों में 17 बल्क मिल्क कूलरों और 1,192 कार्यशील मिल्क प्रोक्योरमेंट प्वाइंट्स के माध्यम से प्रतिदिन औसतन 92,218 किलोग्राम दूध का संग्रह कर रही है।

कंपनी की आर्थिक मजबूती उसके कारोबार के आंकड़ों में साफ झलकती है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में कंपनी का कुल टर्नओवर 16.54 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में लगभग 8.8 गुना बढ़कर 145.01 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त तक ही कंपनी 74.81 करोड़ रुपये का कारोबार कर चुकी है। कारोबार में हुई इस वृद्धि का सीधा लाभ महिला दुग्ध उत्पादकों को मिल रहा है। किसानों को किया जाने वाला भुगतान 2019-20 के 14.38 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 113.10 करोड़ रुपये हो गया है, जो लगभग 8 गुना की बढ़ोतरी दर्शाता है।

कंपनी दूध संग्रह के साथ-साथ पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृत्रिम गर्भाधान, संतुलित पशु आहार, मिनरल मिश्रण और हरा चारा जैसी सुविधाएं भी सदस्यों को उपलब्ध करा रही है। अगस्त 2026 तक सदस्यों द्वारा कुल 13.96 करोड़ किलोग्राम दूध की आपूर्ति की जा चुकी है। इस दौरान 1.97 लाख कृत्रिम गर्भाधान, 7,375 मीट्रिक टन पशु आहार, 129 मीट्रिक टन मिनरल मिश्रण और 139 मीट्रिक टन हरे चारे की आपूर्ति की गई है।

ग्रामीण विकास और सूचना जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि कौशिकी महिला दूध उत्पादक कंपनी ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और सामूहिक उद्यमिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों गठित जीविका के सहयोग से शुरू हुआ यह मॉडल आज हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है। राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे सफल मॉडलों को हर संभव प्रोत्साहन दिया जा रहा है। कौशिकी की यह सफलता दिखाती है कि जब ग्रामीण महिलाओं के छोटे-छोटे प्रयासों को संगठित ढांचे और बाजार से जोड़ा जाता है, तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा और दशा दोनों बदल सकता है।

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