, Oct. 13 -- मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में वर्ष 2005 से 2025 के बीच राज्य में सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। अब इन सुविधाओं के विस्तार के साथ औद्योगिक विकास को तेज गति देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बिहार की अर्थव्यवस्था को नई गति देने के लिए उद्योगों का विस्तार जरूरी है। राज्य में निवेश बढ़ने से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।श्री चौधरी ने कहा कि उद्योगों का विकास ही बिहार की अर्थव्यवस्था को व्यापक स्तर पर बदलने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। बिहार में बिजली की उपलब्धता और बुनियादी ढाँचे में सुधार हुआ है। राज्य में बिजली की खपत पहले की तुलना में काफी बढ़ी है। सरकार नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी संभावनाओं को तलाश रही है, जिससे औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने सीटीआरएलएस से बिहार में डेटा सेंटर क्षेत्र के विस्तार की दिशा में काम करने के लिए आगे आने को कहा।

मुख्यमंत्री ने अगले पाँच वर्षों में बिहार में कम-से-कम 1,000 मेगावाट क्षमता के डेटा सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य रखने को कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने लगभग 13,000 एकड़ भूमि से संबंधित प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में उद्योगों के विकास के लिए आधार तैयार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने गंगा पार और हाजीपुर क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण सहित अन्य औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की कही।

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