, July 30 -- डीजीपी श्री कुमार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से जब गुमशुदा बच्चों को सामान्य अपहरण वाले अपराध की श्रेणी में रखते हुए इनकी तफ्तीश शुरू की गई है, तब से इसमें काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है। 2020 में सामान्य अपहरण के 8 हजार मामले दर्ज किए गए थे, जो 2025 में बढ़कर 24 हजार से अधिक हो गई। यानी पिछले 5 वर्षों में 3 से 4 गुणा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इनकी बरामदगी दर 70 फीसदी है। ट्रैफिकिंग के शिकार बच्चों या महिलाओं की रिकवरी दर कम है। यह गंभीर चिंता का विषय है। इनका विवरण अब केंद्रीय गृह मंत्रालय के स्तर से तैयार 'वात्सल्य पोर्टल' पर अपलोड करना अनिवार्य हो गया है। डीजीपी ने सभी पुलिस पदाधिकारियों से कहा कि बच्चा या महिलाओं के अपहरण या गुमशुदगी के मामलों को बेहद संवेदनशीलता के साथ सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए हल करने की जरूरत है। इनकी जांच के लिए मानसिकता बदलने की भी जरूरत है। इस तरह के मामलों में तस्कर को अंतिम रूप से सजा दिलाए बिना चैन नहीं लेना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि इन मामलों की गवाही में सभी पदाधिकारी को समय निकाल कर प्राथमिकता के आधार पर गवाही देने कोर्ट जाना चाहिए। यदि ऐसे 10 से 15 मामलों लगातार सजा हो जाए, तो इन अपराध पर अंकुश लगाने में काफी मदद मिलेगी। वरीय पदाधिकारियों को खासतौर से इन मामलों पर संज्ञान लेने और अपराधियों को सजा दिलाने पर फोकस करनी चाहिए।
कार्यक्रम में स्वागत संबोधन करते हुए एडीजी (कमजोर वर्ग) श्रीमति कासे एस अनुपम ने कहा कि राज्य के 1200 थानों को वात्सल्य पोर्टल से जोड़ दिया गया है। सभी थानों को गुमशुदा बच्चों की पूरी जानकारी प्राथमिकता के आधार पर तुरंत इस पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है। इससे बच्चों को खोजने में आसानी होगी। अब तक 10 हजार से अधिक बच्चों के रिकॉर्ड इस पर अपलोड कर दिए गए हैं। हाल में चलाए गए अभियान के तहत समस्तीपुर, मोतिहारी समेत अन्य जिलों से बड़ी संख्या में बच्चों और महिलाओं को मानव तस्करी के चंगुल से छुड़ाया गया है। नया सवेरा 3.0 के तहत अब तक 88 तस्करों को सजा दिलाई गई है। उन्होंने कहा कि इस बार स्वतंत्रता दिवस की झांकी में पुलिस अभ्या ब्रिगेड को भी स्थान मिला है।
इस कार्यक्रम के दौरान एडीजी (सीआईडी) पारसनाथ, डीआईजी (कमजोर वर्ग) आमिर जावेद समेत अन्य मौजूद थे।
इस दौरान डीजीपी ने ऑपरेशन नया सवेरा 3.0 और ट्रैफिकिंग के चंगुल से नाबालिगों समेत अन्य को मुक्त कराने में श्रेष्ठ कार्य करने वाले जिलों के कप्तानों को सम्मानित भी किया गया। संबंधित जिलों के एसपी के प्रतिनिधि के तौर पर वहां के डीएसपी (स्पेशल क्राइम) ने पुरस्कार ग्रहण किए। पटना जिला पहले स्थान पर रहा, यहां 56 तस्करों को गिरफ्तार किया गया। दूसरे स्थान पर सहरसा रहा। नाबालिग और महिलाओं की बरामदगी में किशनगंज पहला और सीतामढ़ी दूसरे स्थान पर रहा। वहीं, बगहा के जज मानवेंद्र कुमार मिश्रा के अलावा एसडीपीओ कुमार दयेंद्र और एपीपी जितेंद्र कुमार भारती को विशेषतौर से सम्मानित किया गया। यहां दो तस्करों को ट्रायल चलाकर सिर्फ 34 दिनों में सजा दिलाई।
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