, April 5 -- इस प्रदर्शनी में 33 कलाकारों द्वारा निर्मित कुल 66 कतलाकृतियां प्रदर्शित की गयी है।टिकुली कला की यह प्रदर्शनी इस मायने में ऐतिहासिक है कि भारत में पहली बार इतने व्यापक स्तर पर टिकुली कला की प्रदर्शनी आयोजित की गयी है।
प्रदर्शनी के क्यूरेटर सह बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने कहा टिकुली कला की शुरुआत की कोई निश्चित तारीख बताना कठिन है। उन्होंने कहा कि पुरातत्वविदों को उत्खनन में प्राप्त मौर्यकालीन नारी प्रतिमाओं के ललाट पर बिंदी के अंकन मिले हैं। यह परम्परा बाद के समय में भी निरंतर बनी रही।
पद्मश्री सम्मान से सम्मानित कलाकार अशोक कुमार विश्वास ने कहा कि वह लंबे समय से टिकुली कला के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की ओर से एक देश-एक उत्पाद योजना के टिकुली चित्रकला को चपनित किया गया है। इसकी वजह से आज भारत सहित विदेशों में भी इस कता के प्रशंसक और खरीददार बढ़ रहे हैं। इसके लिए उन्होंने भारत सरकार का आभार जताया।
पटना निफ्ट के निदेशक कर्नल राहुल शर्मा ने कहा कि टिकुली चित्रकला एक बेहतरीन कला है। वर्तमान में टिकुली कला का दायरा काफी विस्तृत है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में टिकुली कला के उत्पाद बिहार से निकलकर दिल्ली, मुंबई जैसे मेट्रो शहरों में दोगुनी कीमत पर बिकते हैं। विदेशों में उन्हीं उत्पादों की कीमत चौगुनी हो जाती है। उन्होंने टिकुली कला के प्रचार-प्रसार के लिये निफ्ट, पटना की ओर से कलाकारों को यथासंभव मदद का आश्वासन भी दिया।
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