, March 23 -- डॉ. नचिकेत कहा कि केंद्र किसानों की आय और जीवन स्तर सुधारने, मखाना के देशव्यापी विस्तार, कम लागत वाली उत्पादन तकनीक के विकास तथा प्रसंस्करण एवं मूल्य वर्धन से संबंधित अनुसंधान और प्रसार गतिविधियों को और गति देने के लिए प्रतिबद्ध है।

मखाना अनुसंधान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ.आर. के विश्वकर्मा ने कहा कि मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और भंडारण के क्षेत्र में नवीनतम शोध के साथ-साथ विशेष यंत्रों के विकास के लिए वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में उद्यमियों को लगातार सहयोग और प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए कृषि वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि मखाना की सांस्कृतिक और आर्थिक महत्ता को देखते हुए 28 फरवरी 2002 को इस केंद्र की स्थापना की गई थी। वर्ष 2005 में इसका राष्ट्रीय दर्जा वापस ले लिया गया था, जिसे पुनः 15 मई 2023 को बहाल किया गया।उन्होंने कहा कि लगभग ढाई दशकों में केंद्र ने मखाना अनुसंधान, उत्पादन, प्रसंस्करण, किसान उद्यमिता और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि गांव स्तर पर मखाना आधारित लघु उद्योग स्थापित किए जाएं तो किसानों की आय बढ़ेगी और स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कृषि वैज्ञानिक डॉ इंदुशेखर सिंह ने मखाना क्षेत्र में हुए यांत्रिकी विकास की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा विकसित आधुनिक तकनीक के प्रसार के लिए कृषकों के बीच नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जिससे किसानों का कौशल विकास आसान हुआ है।

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