, April 24 -- पक्षी केज एवं सभी हिरण प्रजाति के वन्यजीवों के बाड़े में मिस्ट फोगर एवं स्प्रिंकलर लगाए गए हैं। वहीं एमू, ऑस्ट्रिच एवं भालू के बाड़ों में फाउंटेन लगाए गए हैं। सभी बोरवेल की मरम्मति का कार्य पूर्ण कर लिया गया है, जिससे उद्यान में वास कर रहे वन्यजीवों एवं पर्यटकों को पानी की कमी न हो। हाथी के इंक्लोजर में स्प्रिंकलर तथा मोट में लगातार ठंडे पानी की उपलब्धता की व्यवस्था की गई है। गैंडा के लिए अतिरिक्त मोट की व्यवस्था की गई है। जन्तु एवं वनस्पति प्रक्षेत्र के रोड किनारे के पौधों पर पानी छिड़काव की व्यवस्था की गई है।
वन्यजीवों के खानपान में भी बदलाव किया गया है। मांसाहारी वन्यजीवों को अपचता को ध्यान में रखते हुए उनके आहार की मात्रा को कम कर दिया गया है। साथ ही शरीर में पानी की कमी ना हो इसके लिए उनके पेयजल में डायरेस्ट, ग्लूकॉन डी, और ऐलेक्ट्रल पाउडर का उपयोग किया जा रहा है।
चिंपांजी को नारियल पानी, तरबूज,खरबूज,ककड़ी,खीरा,केला, दही भात, अनार का रस, अंगूर एवं संतरा जैसे रसदार फल दिए जा रहे हैं। भालू के आहार में केला के थम्ब नियमित रूप से दिया जा रहा है। घड़ियाल एवं मगर में ऊर्जा की कमी को ध्यान में रखते हुए उनके आहार में वृद्धि की गई है। सभी शाकाहारी एवं मांसाहारी वन्यजीवों में ग्लूकोज एवं होमियोपैथिक दवा लू से बचने के लिए दी जा रही है।
उद्यान में आने वाले दर्शकों के लिए कुल 14 वाटर कूलर (आर.ओ. सहित) की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा कुल 30 स्थानों पर मिट्टी के घड़ों में ठंडे पानी की व्यवस्था की गई है। वन्यजीवों पर 24 घंटे लगातार निगरानी में रखा जा रहा है। प्रभावी निगरानी के लिए सभी कर्मियों को टी-शर्ट एवं टोपी का वितरण किया गया है। आकस्मिक अग्नि से बचाव के लिए कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित