, Oct. 14 -- कौशिकी महिला मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी, अस्पतालों व सरकारी कार्यालयों में सफलतापूर्वक संचालित जीविका दीदी की रसोई जैसी पहल इस बात का प्रमाण हैं कि ग्रामीण महिलाएं अब उत्पादन से लेकर प्रबंधन और बाजार तक हर मोर्चे पर सफल नेतृत्व कर रही हैं। महिला सशक्तीकरण का यह सफर अब लखपति दीदी अभियान के साथ और भी नई ऊंचाइयों को छू रहा है। मार्च 2029 तक 94.71 लाख लखपति दीदियां बनाने के लक्ष्य के तहत अब तक 50.40 लाख से अधिक महिलाओं को इस श्रेणी में शामिल किया जा चुका है।

किशनगंज के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत खारूदह पंचायत की जीविका दीदी बबली देवी ने वर्ष 2018 में समूह से जुड़कर फल की दुकान शुरू की। 2021 में वह बैंक सखी बनीं और 30 हजार रुपये ऋण लेकर ग्राहक सेवा केंद्र चलाया। आज वे बैंकिंग, फल बिक्री और सिलाई से डेढ़ लाख से अधिक सालाना कमाकर आत्मनिर्भर हैं।

अरवल के कलेर प्रखंड अंतर्गत वेलाव गांव की रहने वाली अंजु कुमारी वर्ष 2018 में जीविका से जुड़ीं। वह कावेरी ग्राम संगठन के सहयोग से ग्राहक सेवा केंद्र का संचालन कर रही हैं। वह हर दिन 2.5 लाख से ज्यादा का ट्रांजैक्शन करती हैं। अंजू बताती हैं कि वह बैंक सखी के रूप में दीदियों को वित्तीय सलाह देती हैं।

फूस के छप्पर से 20 लाख के टर्नओवर तक का सफर तय करने वाली शिवहर की दोस्तिया गांव की आमना खातून आज महिला उद्यमिता की मिसाल हैं। 2017 में आला हजरत जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने 40 हजार रुपये का ऋण लिया। आज लहठी उद्योग से वह सालाना 5- 6 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमा रही हैं।

ग्रामीण विकास और सूचना एवं जन सम्पर्क मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिला सशक्तिकरण के लिए बच्चियों को पढ़ाया लिखाया और बेहतरीन माहौल दिया। नशाबंदी कर समाज में शांति स्थापित करने की बड़ी पहल की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सरकारी नौकरी में 35 फीसदी तथा स्थानीय जन प्रतिनिधियों के चुनाव में 50 फीसदी आरक्षण देकर उन्हें आगे बढ़ाने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि जीविका की दीदियां आर्थिक रूप से समाज को स्वावलंबी बना रही हैं। यह देश के विकास और स्वच्छ एवं समृद्ध बिहार की परिकल्पना को साकार कर रही हैं। नवरात्रि के मौके पर मातृ शक्ति को नमन करते हैं। ये समाज में नया आयाम गढ़ने का काम कर रही हैं।

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