, Sept. 1 -- मंत्री ने कहा कि इस दिशा में हम सभी को आगे की सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सोच से ये अभियान धरती पर उतरा। इसका परिणाम भी सामने है। आज हरित पट्टी और जल संरचनाओं को अतिक्रमण मुक्त कराने में सकारात्मक परिणाम मिला है।इस अवसर पर विभाग के सचिव जय सिंह ने कहा कि सार्वजनिक जल निकायों को अतिक्रमण मुक्त कराने के कार्य की प्रभावी निगरानी के लिए विभाग अलग सेल बनाकर मॉनिटरिंग करेगा। उन्होंने कहा कि तालाबों, पोखरों, आहरों और पईनों सहित अन्य सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं की पहचान और उनके संरक्षण के लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

श्री सिंह ने कहा कि जल निकाय केवल प्राकृतिक संसाधन ही नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। इसलिए इन संरचनाओं को संरक्षित रखना और अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी विभागों के अधिकारियों से इस दिशा में गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में जल-जीवन-हरियाली अभियान के उद्देश्यों तथा सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं के संरक्षण और पुनर्जीवन के संबंध में भी विस्तार से चर्चा की गई। परिचर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि राजस्व अभिलेखों के आधार पर सार्वजनिक जल निकायों की पहचान कर उनके संरक्षण के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए तथा अतिक्रमण के मामलों में प्रभावी और समयबद्ध कदम उठाए जाएं।

इस अवसर पर सचिव श्रीमती सीमा त्रिपाठी, भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के निदेशक सुहर्ष भगत, मिशन निदेशक (जल-जीवन-हरियाली) सुमित कुमार, उप मिशन निदेशक (जल-जीवन-हरियाली) राम कुमार पोद्दार, विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. सुनील कुमार, विशेष कार्य पदाधिकारी नवाजिश अख्तर, सहायक निदेशक सुबोध कुमार, सहायक निदेशक-सह-जनसंपर्क पदाधिकारी सुश्री जूही कुमारी, कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री सोनम कुमारी, सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी श्रीमती पल्लवी, प्रशाखा पदाधिकारी शशि शेखर समेत विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।

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