, July 13 -- उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार ने कहा, "रैम्प कार्यक्रम के अंतर्गत जलकुंभी शिल्प विकास परियोजना बिहार में सतत उद्यमिता और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस परियोजना के माध्यम से कॉमन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना, कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण, उत्पाद डिज़ाइन, गुणवत्ता संवर्धन तथा प्रभावी विपणन व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे जलकुंभी आधारित शिल्प उत्पादों के लिए एक सुदृढ़ मूल्य श्रृंखला तैयार होगी। उन्होंने कहा कि यह पहल स्थानीय संसाधनों को आर्थिक अवसरों में परिवर्तित करते हुए बिहार के एमएसएमई, हस्तशिल्प एवं वस्त्र क्षेत्र को नई दिशा प्रदान करेगी और ग्रामीण कारीगरों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने में सहायक होगी।"यह परियोजना जलकुंभी को एक उपयोगी एवं टिकाऊ कच्चे माल के रूप में विकसित करते हुए पर्यावरण अनुकूल उद्यमिता को बढ़ावा देगी। आगामी आठ माह में इस परियोजना के माध्यम से 200 कारीगरों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, जिनमें सहरसा जिले के 150 तथा वैशाली जिले के 50 कारीगर शामिल हैं।

परियोजना के अंतर्गत कॉमन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना की जाएगी, जहां आधुनिक उत्पादन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही कारीगरों को कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण प्रशिक्षण, उत्पाद डिज़ाइन एवं नवाचार सहायता तथा प्रभावी विपणन एवं बाजार संपर्क उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उनके उत्पादों की गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धात्मकता एवं बाजार तक पहुंच में वृद्धि होगी।

यह पहल बिहार के हस्तशिल्प एवं वस्त्र क्षेत्र को नई गति प्रदान करने के साथ-साथ सतत उद्यमिता को प्रोत्साहित करेगी, ग्रामीण समुदायों की आय में वृद्धि करेगी तथा पर्यावरण संरक्षण और समावेशी औद्योगिक विकास के राज्य सरकार के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाएगी।

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