, Sept. 16 -- श्री प्रसाद ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों की भूमिका केवल सदन की कार्यवाही में भाग लेने तक सीमित नहीं है। उन्हें कानून निर्माण, नीतिगत विमर्श, बजट की समीक्षा और जनता से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से सदन में उठाने की जिम्मेदारी भी निभानी होती है। इसी उद्देश्य से जदयू समय-समय पर अपने जनप्रतिनिधियों की कार्यक्षमता और विधायी समझ को मजबूत करने वाले कार्यक्रम आयोजित करता रहा है।उन्होंने कहा कि राज्यहित और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जनप्रतिनिधियों को अधिक जवाबदेह, सक्षम और प्रभावी बनाना इस ओरिएंटेशन कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है।
जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने विपक्षी दल पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर राज्य का मुख्य विपक्षी दल अपनी हुड़दंग शैली और चर्चित 'तेल पिलावन रैली' आयोजित करने वाली पार्टी के रूप में जाना जाता है, वहीं दूसरी ओर जदयू जनसरोकार के मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए अपने विधायकों एवं विधानपार्षदों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। उन्होंने कहा कि इससे दोनों राजनीतिक संस्कृतियों के बीच का अंतर स्पष्ट होता है।
उन्होंने कहा कि उस दौर की शासन व्यवस्था की कार्यशैली बिहार के विकास और राज्य की छवि के संदर्भ में गंभीर सवाल खड़े करती है। इसके विपरीत जदयू अपने जनप्रतिनिधियों की विधायी क्षमता बढ़ाने और उन्हें जनता एवं राज्य के प्रति अधिक जवाबदेह बनाने के लिए प्रशिक्षण एवं ओरिएंटेशन कार्यक्रमों को महत्व देता है।
श्री प्रसाद ने कहा कि जदयू का यह ओरिएंटेशन कार्यक्रम इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसके माध्यम से पार्टी के विधायक एवं विधानपार्षद विधायी प्रक्रियाओं की बेहतर समझ हासिल कर राज्यहित और जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर सदन में अधिक प्रभावी एवं जिम्मेदार भूमिका निभा सकेंगे।
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