, May 2 -- स्वागत संबोधन करते हुए डॉ. ममता स्नेही ने कहा कि मात्र संस्कृत ही हमें अपनी जड़ों से जोड़ती है। यह व्यवस्थित, वैज्ञानिक एवं समृद्ध भाषा है, जिसके बिना अन्य भाषाओं की उपयोगिता नगण्य है। उन्होंने कहा कि ज्ञान विज्ञान युक्त संस्कृत को कंप्यूटर, अंतरिक्ष, चिकित्सा एवं एआई आदि से जोड़कर विकसित भारत के सपनों को साकार किया जा सकता है।

डॉ शम्भू कान्त झा ने कहा कि संस्कृत हमें पर्यावरण शुद्धता आदि के साथ ही सुव्यस्थित विकास सिखाती है। जो ज्ञान विज्ञान इसमें है, वही अन्यत्र भी है।

डॉ. संजीव कुमार साह ने कहा कि संस्कृत भारत भूमि की भाषा है, जो सभी विद्याओं की मूल जड़ है। यह हमारी स्मिता एवं पहचान से जुड़ी है जिस पर हमें गर्व है। इसके बिना भारतीय दर्शनों को नहीं समझा जा सकता है।

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