, May 22 -- राज्य में निवेशकों को आकर्षित करने तथा चीनी उद्योग के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से वर्ष 2014 की प्रोत्साहन नीति को संशोधित कर "बिहार राज्य गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति-2026" तैयार की गई है। यह नीति वर्तमान में अंतिम चरण में है। नई नीति में निवेशकों को अधिक आकर्षक प्रोत्साहन, आधारभूत संरचना सहयोग एवं उद्योग स्थापना से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर विशेष बल दिया गया है। विभाग लगातार देश-विदेश के संभावित निवेशकों के संपर्क में है तथा शीघ्र ही निवेशक सम्मेलन आयोजित करने की योजना है।
राज्य सरकार गन्ना उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कृषि मॉडल को बढ़ावा देने की दिशा में भी कार्य कर रही है। इसके लिए वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट, पुणे, शुगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट, कोयंबटूर एवं आईआईटी पटना के साथ तकनीकी सहयोग एवं कंसल्टेंसी सेवाओं के लिये प्रस्ताव तैयार किया गया है। इन संस्थानों के सहयोग से उन्नत प्रभेद, आधुनिक कृषि तकनीक, रोग एवं कीट प्रबंधन, जल प्रबंधन तथा डेटा आधारित खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री गन्ना विकास कार्यक्रम, गन्ना यंत्रीकरण योजना, गन्ना फसल क्षेत्र विस्तार योजना एवं बिहार राज्य गुड़ उद्योग कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र, उन्नत बीज, तकनीकी प्रशिक्षण एवं बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से गन्ना उत्पादन बढ़ाने, लागत कम करने एवं किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। साथ ही गन्ना आधारित उद्योगों के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की संभावना है।
मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार राज्य में चीनी उद्योग के पुनर्जागरण के लिये प्रतिबद्ध है। बंद पड़ी चीनी मिलों के पुनरुद्धार एवं नई मिलों की स्थापना से राज्य में औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। सरकार का उद्देश्य केवल उद्योग स्थापित करना नहीं, बल्कि गन्ना किसानों की आय बढ़ाना, रोजगार के अवसर सृजित करना एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है।
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