, Feb. 27 -- मंत्री ने द्वारा स्पष्ट किया गया कि चापाकल का निर्माण केवल उन पंचायतों, टोलों और जल स्रोतों के निकट किया जाएगा जहाँ पर पेयजल आपूर्ति में अत्यधिक समस्या आने की सम्भावना हो, या जहां हर घर नल का जल का कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हुआ है। यह वैकल्पिक व्यवस्था अस्थायी सुरक्षा कवच का कार्य करेगी। उन्होंने बताया कि भूजल स्तर में गिरावट वाले क्षेत्रों में राइजर पाइप बढ़ाकर चापाकलों को कार्यरत बनाए रखने की व्यवस्था की जाएगी तथा इसके लिए पर्याप्त सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
मंत्री श्री सिंह ने कहा कि अकार्यरत चापाकलों की संख्या के अनुरूप प्रत्येक जिले में मरम्मती दलों का गठन कर अभियान मोड में कार्य कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि मरम्मती दलों को मार्च के दूसरे सप्ताह से पूर्व जिला पदाधिकारी द्वारा हरी झंडी दिखाकर प्रभावित प्रखंडों एवं पंचायतों में रवाना किया जाएगा, जिसका व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा।मरम्मती के बाद सभी चापाकलों की प्रविष्टि अधिकतम अगले दिन ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज की जाएगी। जियो-टैग्ड फोटोग्राफ एवं सामाजिक प्रमाणीकरण के आधार पर ही भुगतान किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि जल गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों में आर्सेनिक, फ्लोराइड अथवा आयरन की अनुमेय सीमा से अधिक मात्रा पाए जाने वाले पेयजल स्रोतों को लाल रंग से चिन्हित करने का विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिससे मजन को ऐसे स्रोतों के उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति जागरूक किया जा सके।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में पेयजल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि अकार्यरत चापाकलों की त्वरित मरम्मती तथा 'हर घर नल का जल' योजना के टैप कनेक्शन को सदैव क्रियाशील रखने के निर्देश दिए गए हैं,जिससे बच्चों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।इसके अलावा गर्मी के मौसम में पशुओं के लिए पेयजल की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये विभाग द्वारा निर्मित कुल 261 कैटल ट्रफ (पशु प्याऊ) की क्रियाशीलता का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। जहाँ मरम्मती की आवश्यकता होगी, वहाँ नियमानुसार तत्काल मरम्मती कराकर उन्हें कार्यशील बनाया जाएगा।इसके अलावा विभाग की शिकायत निवारण प्रणाली को और भी प्रभावी बनाने के लिए सीजीआरसी के अंतर्गत संचालित कॉल सेंटर की क्षमता आगामी महीनों में चरणबद्ध रूप से बढ़ायी जाएगी, जिससे आमजनों के लिए शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया और अधिक सरल हो सके।
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