, Sept. 25 -- सचिव ने कहा कि गन्ने का उत्पादन बढ़ने से भविष्य में चीनी मिलों और अन्य कृषि आधारित उद्योगों के लिए भी अनुकूल माहौल तैयार होगा।ईखायुक्त अनिल कुमार झा ने बताया कि गन्ने की खेती से जुड़े यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से 80 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि किसानों को गन्ने की खेती के लिए नि:शुल्क बीज उपलब्ध कराने की योजना भी संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन सीड के उत्पादन, प्रमाणित बीज उत्पादन और किसानों को बीज उपलब्ध कराने के लिए अलग-अलग प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया है।
संगोष्ठी के दौरान किसानों ने मंत्री से सीधे संवाद किया तथा गन्ने की खेती से जुड़ी अपनी समस्याओं एवं आवश्यकताओं से अवगत कराया। पटना एवं गया जैसे गैर-चीनी मिल क्षेत्र के किसानों ने अपने-अपने क्षेत्रों में चीनी मिल की स्थापना की मांग रखी। आरा, भोजपुर के किसानों ने गन्ने की खेती में यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना की मांग की। किसानों ने कहा कि आधुनिक कृषि यंत्रों की उपलब्धता बढ़ने से समय एवं लागत में कमी आएगी तथा गन्ने की खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकेगा।
मंत्री ने किसानों की बातों को गंभीरता से सुना तथा विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि गन्ने की खेती से जुड़े किसानों को उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण एवं बाजार तक आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
संगोष्ठी में वैज्ञानिकों ने किसानों को गन्ने की उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती, बेहतर बीज चयन, तकनीकी प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी। विभाग ने किसानों को भरोसा दिलाया कि खेती से लेकर उत्पादन और बाजार तक उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार और विभाग उनके साथ खड़े हैं।
इस मौके पर संयुक्त ईखायुक्त वेदव्रत कुमार, संयुक्त निदेशक रेमन्त झा, ईख अनुसंधान संस्थान पूसा के वरीय वैज्ञानिक डॉ. डीएन कामत, डॉ. अनिल कुमार सहित अन्य वैज्ञानिक, पटना, भोजपुर, जहानाबाद और गयाजी जिले के किसान उपस्थित थे।
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