पटना , अगस्त 21 -- बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को कहा कि बिहार का सार्वजनिक कर्ज चार गुना से अधिक बढ़ गया है और ऐसे हालात में प्रदेश गंभीर वित्तीय संकट के दबाव में है।

श्री यादव ने दावा किया कि राज्य की वित्तीय स्थिति इतनी बदतर हो गई है कि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को भुगतान, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, ठेकेदारों के बकाये तथा विभिन्न विकास कार्यों के लिए समय पर धन उपलब्ध नहीं हो रहा है।

राजद नेता ने यह भी आरोप लगाया कि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत उपलब्ध राशि कम कर दी गई है और छात्रवृत्तियां बंद की जा रही हैं।

श्री यादव ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार की वित्तीय स्थिति खराब हुई है। राजस्व घाटा बढ़ रहा है, जबकि कर्ज का बोझ कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि 2025-26 में बिहार का राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 5.8 प्रतिशत रहा, जो उनके अनुसार प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि उच्च राजकोषीय घाटा और भारी कर्ज का बोझ गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के खर्च के अनुपात में राजस्व संग्रह पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सरकार पर राजस्व सृजन और संग्रह बढ़ाने के के प्रयासों में कमी , बजट प्रबंधन में गड़बड़ी तथा राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए किस दीर्घकालिक ठोस योजना के अभाव का आरोप लगाया।

श्री यादव ने कहा कि राजग सरकार ने पिछले दो वर्षों के दौरान रिकॉर्ड राशि कर्ज लिया, फिर भी राज्य का खजाना खाली है। उन्होंने सवाल किया कि बिहार का सारा पैसा आखिर जा कहां रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि राजग सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और संगठित वित्तीय अनियमितताएं रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।

राजद नेता ने कहा कि सरकार बिहार को ऐसी वित्तीय स्थिति में धकेल रही है, जिसका राज्य के लोगों के वर्तमान और भविष्य दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।उन्होंने कहा कि वित्तीय संकट बिहार के लोगों के लिए सामूहिक चिंता का विषय है और मौजूदा राजग सरकार इस संकट का समाधान करने में सक्षम नहीं है।

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