, Sept. 9 -- राजधानी पटना में भी खेल अवसंरचना को लगातार मजबूत किया गया है। पाटलिपुत्र खेल परिसर (कंकड़बाग) को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया, जहां फुटबॉल, एथलेटिक्स और बहुउद्देशीय इंडोर खेलों की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं का आयोजन हो रहा है। ऊर्जा स्टेडियम, मोइनुल हक स्टेडियम के पुनर्विकास की पहल, प्रशिक्षण केंद्रों का विस्तार तथा राज्यभर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना ने खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं का मंच उपलब्ध कराया है। सरकार पटना के पुनपुन क्षेत्र में अत्याधुनिक स्पोर्ट्स सिटी विकसित करने की दिशा में भी तेजी से काम कर रही है।राज्य में खेल अवसंरचना का विस्तार अब केवल राजधानी और बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रखंड और जिला स्तर तक खेल सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है। विभिन्न जिलों में खेल भवन-सह-व्यायामशाला, इंडोर हॉल, खेल मैदान और प्रशिक्षण सुविधाओं का विकास किया गया है। वहीं, प्रखंड और पंचायत स्तर पर भी खेल मैदानों को विकसित कर युवाओं को स्थानीय स्तर पर अभ्यास और प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराया जा रहा है। इन सुविधाओं में एथलेटिक्स, फुटबॉल, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, बैडमिंटन सहित विभिन्न खेलों के लिए आधारभूत सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इससे ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को अपने ही क्षेत्र में नियमित अभ्यास का अवसर मिल रहा है और उन्हें जिला, राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंचने का रास्ता आसान हो रहा है।
इन्हीं आधारभूत सुविधाओं का परिणाम है कि पिछले दो वर्षों में बिहार को एक के बाद एक कई प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं की मेजबानी मिली। वर्ष 2024 में महिला एशियाई हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी का सफल आयोजन राजगीर में हुआ। इसके बाद वर्ष 2025 में सेपक टकरा वर्ल्ड कप, खेलो इंडिया यूथ गेम्स, एशिया अंडर-20 रग्बी सेवन्स चैंपियनशिप, पुरुष हॉकी एशिया कप, 68वीं नेशनल स्कूल गेम्स (फेंसिंग एवं साइक्लिंग), उमंग खेल प्रतियोगिता, कबड्डी लीग की प्रतियोगिताएं, इसी वर्ष मार्च में द्वीतीय महिला कबड्डी लीग प्रतियोगिता समेत ऐसे कई राष्ट्रीय चैंपियनशिप का सफल आयोजन बिहार में हो चुका है। इन आयोजनों में दर्जनों देशों तथा राज्यों के खिलाड़ियों ने भाग लिया, जिससे बिहार की आयोजन क्षमता को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली।
खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि खेल विभाग का लक्ष्य केवल स्टेडियम बनाना नहीं, बल्कि बिहार में ऐसी खेल संस्कृति विकसित करना है, जहां गांव-कस्बों की प्रतिभाओं को भी विश्वस्तरीय सुविधाएं और आगे बढ़ने का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि आधुनिक खेल अवसंरचना, बेहतर प्रशिक्षण और राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। हमारा प्रयास है कि खेल के माध्यम से प्रतिभाओं को पहचान, खिलाड़ियों को सम्मान और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलें।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित