नयी दिल्ली , मार्च 11 -- नवाचार, प्रौद्योगिकी सेवाओं और नये युग की अर्थव्यवस्था में बिहार को अग्रणी बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार की ओर से गठित सर्वोच्च समितियों की दूसरी बैठक बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित की गयी जिसमें अगले पांच साल में राज्य को वैश्विक बैकएंड केंद्र और वैश्विक कार्य स्थल के रूप में स्थापित करने की कार्य योजना तैयार की गयी।

बिहार सरकार ने औद्योगिक विकास और नयी अर्थव्यवस्था के लिए राज्य स्तरीय समिति, आधारभूत संरचना विकास समिति और कौशल विकास एवं रोजगार सृजन समिति का गठन किया है।

राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में तीनों समितियों की बैठक के दौरान राज्य के लिए प्रौद्योगिकी आधारित विकास की दीर्घकालिक रणनीति और निवेश आकर्षित करने के लिए राज्य को पूर्वी भारत के टेक हब के रूप में विकसित करने के प्रस्तावित रोडमैप पर चर्चा हुई। इसके अंतर्गत सेमीकंडक्टर विनिर्माण , वैश्विक क्षमता केंद्र, मेगा टेक सिटी तथा फिन-टेक सिटी जैसी प्रमुख परियोजनाओं पर विचार किया गया।

स्टार्टअप, नवाचार और युवाओं के लिए रोजगारोन्मुख अवसरों को बढ़ावा देने की रणनीतियों पर भी चर्चा हुई। कार्यान्वयन की रणनीति, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय तथा उद्योग जगत के साथ साझेदारी को मजबूत करने के उपायों पर भी मंथन हुआ।

श्री अमृत ने कहा कि बिहार सरकार का प्रमुख लक्ष्य राज्य में निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करना है, ताकि देश और विदेश के निवेशक बिहार में उद्योग स्थापित करने के लिए आगे आएं। बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली युवा शक्ति की उपलब्धता, तेजी से विकसित होती आधारभूत संरचना और सरकार की निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियां राज्य को निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना रही हैं। उन्होंने बताया कि इस मंच के माध्यम से वैश्विक निवेशकों तथा उद्योग जगत को बिहार में उपलब्ध अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जायेगा।

उद्योग विभाग के सचिव और बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) के प्रबंध निदेशक कुंदन कुमार ने राज्य में स्टार्टअप और नये युग की अर्थव्यवस्था से जुड़े निवेश को बढ़ावा देने की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य बिहार को टेक्नोलॉजी कंपनियों, स्टार्टअप्स और सेवा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों के लिए एक सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करना है। उन्होंने यह भी बताया कि आगामी औद्योगिक सम्मेलनों के माध्यम से निवेशकों, उद्योगपतियों और वैश्विक उद्यमियों को बिहार में उपलब्ध औद्योगिक अवसरों से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह ने राज्य सरकार के कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) मिशन से जुड़ी पहलों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि एआई और उभरती डिजिटल तकनीकों के क्षेत्र में बिहार के पास व्यापक संभावनाएं हैं। यदि इन क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित किया जाये तो इससे न केवल नये उद्योग स्थापित होंगे बल्कि युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रत्येक शीर्ष समिति के लिए स्पष्ट और समयबद्ध कार्य योजना तैयार की जायेगी, ताकि प्रस्तावित पहलों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सके। इसके तहत प्रमुख प्राथमिकताओं, आवश्यक नीतिगत हस्तक्षेपों तथा रणनीतिक पहलों की पहचान की जायेगी।

साथ ही यह भी सुझाव दिया गया कि राज्य सरकार, उद्योग जगत, शिक्षण संस्थानों और स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर प्रौद्योगिकी आधारित विकास को गति दी जाये। उच्च संभावनाओं वाले स्टार्टअप्स को तेजी से विकसित कर यूनिकॉर्न बनने की दिशा में मार्गदर्शन देने, उन्हें बाजार, वित्तपोषण, इनक्यूबेशन और वैश्विक साझेदारियों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। विशेष रूप से एआई, डीप टेक, फिनटेक, एग्रीटेक और हेल्थटेक जैसे क्षेत्रों में उद्यमों के विस्तार को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई गई।

बैठक में वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर, कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल, वित्त विभाग की सचिव (व्यय) रचना पाटिल, उद्योग (एमएसएमई) निदेशक अमन समीर, उद्योग निदेशक मुकुल कुमार गुप्ता तथा कृषि विभाग के निदेशक सौरव सुमन यादव उपस्थित थे।

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