पटना , सितंबर 25 -- िहार में शासन और विकास से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग की संभावनाएं तलाशने की पहल शुरू कर दी गई है, इसके लिए जल्द ही पटना में स्पेस एप्लीकेशंस एडॉप्शन वर्कशॉप (एसएएडब्ल्यू) होगी। वर्कशॉपअक्टूबर में संभावित है। इस वर्कशॉप को लेकर तैयारियां तेजी से की जा रही है।

इसी क्रम में शुक्रवार को बिहार सरकार के विभिन्न विभागों और उपयोगकर्ता एजेंसियों के प्रमुख अधिकारियों के साथ प्री-एसएएडब्ल्यू यूजर इंटरैक्शन मीटिंग ऑनलाइन आयोजित की गई।

इस बैठक का उद्देश्य राज्य सरकार के विभागों को अपनी व्यावहारिक चुनौतियों, समस्या-कथनों और उपयोग-प्रकरणों को प्रस्तुत करने का अवसर देना था। इन समस्याओं को अंतरिक्ष आधारित और अंतरिक्ष सक्षम समाधान विकसित करने वाली संस्थाओं के साथ साझा किया जाएगा, जिससे बिहार की आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान तैयार किए जा सकें। इन समाधानों को पटना में प्रस्तावित मुख्य एसएएडब्ल्यू में प्रस्तुत किया जाएगा।

शुक्रवार को हुई इस बैठक का आयोजन बिहार सरकार के विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग और भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत इन्स्पेस की ओर से किया गया। इसमें बिहार सरकार के 26 विभागों और उपयोगकर्ता एजेंसियों ने अपने-अपने क्षेत्र से जुड़े समस्या-कथनों और संभावित तकनीकी जरूरतों को प्रस्तुत किया।

इस मौके पर विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव हिमांशु शर्मा ने कहा कि बिहार की विकास संबंधी चुनौतियों के समाधान में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। विभागों की वास्तविक जरूरतों और समस्याओं को तकनीकी संस्थाओं के साथ साझा कर राज्य के लिए उपयोगी और व्यावहारिक समाधान विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। एसएएडब्ल्यू के माध्यम से विभिन्न विभागों को एक मंच पर लाकर उपग्रह डेटा, भू-स्थानिक तकनीक और अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।

एसएएडब्ल्यू के तहत बाढ़ पूर्वानुमान और आपदा जोखिम न्यूनीकरण, नदी बेसिन एवं जल संसाधन प्रबंधन, कृषि एवं फसल निगरानी, सूखा एवं भूजल आकलन, शहरी विकास एवं स्मार्ट सिटी नियोजन, भू-अभिलेख आधुनिकीकरण और कैडस्ट्रल मैपिंग जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इसके अलावा सीमा प्रबंधन, गृह सुरक्षा, बुनियादी ढांचा एवं परिवहन नियोजन, ग्रामीण विकास, पर्यावरण एवं वन निगरानी, जलवायु अनुकूलन, मत्स्य पालन तथा पर्यटन एवं विरासत संरक्षण भी प्रमुख विषयों में शामिल हैं।

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