पटना , अगस्त 05 -- बिहार के राज्यपाल-सह-कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने बुधवार को बिहार कृषि विश्वविद्यालय,सबौर सबौर के स्थापना दिवस कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में यह विश्वविध्यालय नवाचार और तकनीक के माध्यम से कृषि परिवर्तन के अग्रदूत के रूप में स्थापित होगा।

राज्यपाल ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार को बधाई और शुभकामनाएँ देते हुए कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में बिहार कृषि विश्वविद्यालय के उल्लेखनीय योगदान की सराहना की। उन्होंने विश्वविद्यालय को प्राप्त नैक 'ए' ग्रेड मान्यता तथा जलवायु-अनुकूल कृषि किस्मों के विकास में उसकी उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को नवाचार, परामर्श और शैक्षणिक उत्कृष्टता के माध्यम से निरंतर आगे बढ़ना चाहिए।

श्री हसनैन ने कहा कि भारत के विकास में कृषि की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा खाद्य सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, जल संकट और कृषि क्षेत्र की बदलती चुनौतियों के समाधान के लिए विज्ञान, आधुनिक प्रौद्योगिकी तथा किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सशक्त साझेदारी आवश्यक है। उन्होंने जल, तकनीक, ज्ञान, मूल्य संवर्धन और बाजार को बिहार की कृषि प्रगति के पाँच प्रमुख आधार बताया।

राज्यपाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रिसिजन फार्मिंग, ड्रोन तकनीक, रिमोट सेंसिंग और क्लाइमेट-स्मार्ट खेती आज की जरूरत हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों से कहा कि उनका शोध किसानों के खेतों तक पहुँचे और खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद करे। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वह केवल नौकरी की सोच तक सीमित न रहें, बल्कि नए विचारों, शोध और उद्यमिता के माध्यम से देश और समाज की सेवा करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बिहार कृषि के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन सकता है और विकसित बिहार के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। साथ ही उन्होंने बिहार में उच्च शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से विकसित इंस्टेंट लो-कॉस्ट ब्लू टी, रॉ जैकफ्रूट फ्लोर, हनी स्पून, विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर आधारित एक वृत्तचित्र तथा कृषि के लिए विकसित कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित 'एग्री ग्रंथ' रिट्रीवल ऑगमेंटेड जनरेशन चैटबोट का लोकार्पण भी किया।

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