, April 15 -- राज्य में आयोजित विभिन्न कृषि आयोजनों ने भी किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बिहार नर्सरी एवं ग्रीन-टेक कॉन्क्लेव 2026 में 50,000 से अधिक लोगों की भागीदारी रही, वहीं एग्रो बिहार 2026 में 35,000 से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया और कृषि यंत्रों पर 1.85 करोड़ रुपये का अनुदान वितरित किया गया। बागवानी महोत्सव 2026 में 1,500 किसानों द्वारा 7,696 उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। राज्य में अब तक 1.65 करोड़ से अधिक किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किए जा चुके हैं। फार्म मशीनरी बैंक योजना के तहत कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।25 जिलों में 32 अनुमंडल स्तरीय मिट्टी जाँच प्रयोगशाला की स्थापना की गई साथ ही, 12 राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्रों में मॉडल कस्टम हायरिंग सेन्टर की स्थापना की गई।
कृषि विभाग ने बिहार को मखाना, लीची और मशरूम उत्पादन में देश का अव्वल राज्य बनाने पर विशेष जोर दिया है । 'बिहार फ्रेश' ब्रांड के तहत सब्जी उत्पादन और शहद उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। बिहार मखाना विकास योजना के माध्यम से मखाना उत्पादकों को प्रसंस्करण और निर्यात के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है । बागवानी क्षेत्र में बिहार की पहचान लगातार मजबूत हो रही है। राज्य मखाना, लीची और मशरूम उत्पादन में अग्रणी है। शहद उत्पादन में पिछले एक दशक में 177 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है और राष्ट्रीय उत्पादन में राज्य का योगदान 12.30 प्रतिशत रहा है। प्याज उत्पादन में बिहार देश में चौथे स्थान पर है और 'बिहार फ्रेश' ब्रांड के माध्यम से उत्पादों को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए राज्य के 21 प्रमुख कृषि बाजार प्रांगणों (जैसे मुसल्लहपुर, गुलाबबाग, आरा) के विकास के लिये हेतु 1,289 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं । इन केंद्रों पर सोलर पैनल, वे-ब्रिज, और वैज्ञानिक भंडारण जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं ।
कृषि विभाग का संकल्प बिहार के किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य में बिहार की अग्रणी भूमिका सुनिश्चित करना है। कृषि विभाग की इन पहलों और उपलब्धियों से स्पष्ट है कि बिहार कृषि के क्षेत्र में नवाचार, पारदर्शिता और किसान-केन्द्रित विकास के मॉडल को आगे बढ़ा रहा है। राज्य सरकार किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था के निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत है। 'समृद्ध किसान, सशक्त बिहार' का यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।
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