पटना , सितंबर 6 -- बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने रविवार कोव राज्य की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने तथा शिक्षा को संस्कार से जोड़ने के लिए आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर से सहयोग का आग्रह किया है।

बिहार सरकार के शिक्षा विभाग से रविवार को जारी सूचना के अनुसार, श्री तिवारी ने बेंगलुरु के कनकपुरा स्थित आर्ट ऑफ लिविंग अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित बिहार महोत्सव के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि शिष्य को गुरु से मांगने का अधिकार है। उन्होंने श्री श्री रविशंकर से बिहार की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलावों को नई दिशा देने में सहयोग की अपेक्षा जताते हुए कहा कि शिक्षा को संस्कार से जोड़ने में उनकी मदद चाहिए और उम्मीद है कि वह निराश नहीं करेंगे।

श्री तिवारी ने कहा कि वह यहां मंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक छात्र के रूप में सीखने आए हैं। गुरु सनातन परंपरा के सबसे बड़े स्तंभ हैं। गुरु के बिना न ज्ञान संभव है और न संस्कार। इसलिए बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ उनमें अच्छे संस्कार विकसित करना भी जरूरी है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि बिहार ने शिक्षा सहित सभी क्षेत्रों में ऊंची उड़ान भरने के लिए खुद को तैयार किया है। राज्य की युवा शक्ति इसकी सबसे बड़ी ताकत है। बिहार में देश की तुलना में करीब दो प्रतिशत अधिक युवा शक्ति है। युवा देश का भविष्य हैं और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

श्री तिवारी ने कहा कि बिहार सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास तथा उनमें संस्कार और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए लगातार काम कर रही है। इस दिशा में समाज के प्रतिष्ठित लोगों और संस्थाओं का सहयोग भी महत्वपूर्ण है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि बिहार की पहचान केवल शिक्षा और ज्ञान की धरती के रूप में ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और खान-पान के लिए भी है। बिहार के पारंपरिक व्यंजनों और पकवानों की पहचान अब देश की सीमाओं के पार भी पहुंच रही है।

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