पटना , अक्टूबर 18 -- बिहार में पंचायतों और स्थानीय नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने की पहल ग्रामीण विकास और महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुई है।बिहार में स्थानीय नगर निकायों और पंचायत स्तरीय चुनावों में वर्ष 2006-07 में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने की शुरुआत की गई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी एनडीए की सरकार ने यह ऐतिहासिक निर्णय लिया था, जिसका सार्थक असर आज व्यापक रूप से दिखने लगा है।

महिला जनप्रतिनिधियों के स्तर से बदलाव की नई इबारत गढ़ने का सिलसिला निरंतर जारी है। स्थानीय नेतृत्व और प्रगतिशील सोच के साथ ही सम्राट चौधरी सरकार के खास सहयोग से विकास ने अपना रास्ता अख्तियार कर लिया है।पंचायतें इसी बदलाव की गवाह बन रही हैं। यहां महिला मुखिया, जनप्रतिनिधि, वार्ड सदस्य और जीविका दीदियां वर्षों पुरानी रूढ़िवादी सोच से इतर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की नई कहानी लिख रही हैं। इन्होंने यह साबित कर दिया है कि एक सही अवसर और समान अधिकार देकर इन्हें हर क्षेत्र में सशक्त बनाया जा सकता है। पंचायत और स्थानीय नगर निकाय स्तर पर यह पूरी तरह खरी उतर रही है।

मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर प्रखंड की पैगम्बरपुर पंचायत की मुखिया प्रियंका कुमारी ने स्थानीय नेतृत्व का शानदार उदाहरण पेश किया है। स्वस्थ पंचायत के विजन के साथ उन्होंने पंचायत को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प लिया और हर बैठक में टीबी रोकथाम को प्राथमिकता दी। उन्होंने चिन्हित टीबी मरीजों को व्यक्तिगत रूप से 'गोद' लिया और उन्हें पौष्टिक आहार के पैकेट उपलब्ध कराए। उनके इस मानवीय दृष्टिकोण से टीबी से जुड़े कलंक में कमी आई और मरीजों में इलाज पूरा करने की दर बढ़ी। आज यह पंचायत एक मॉडल स्वस्थ पंचायत के रूप में पहचानी जा रही है।

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