, Sept. 26 -- विधिक सहायता क्लिनिक की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने कहा कि आर्थिक असमर्थता के कारण कोई बंदी अधिवक्ता अथवा न्यायिक सहायता से वंचित नहीं रहना चाहिए। सभी पात्र बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता, पैनल अधिवक्ता, जमानत, अपील एवं अन्य उपलब्ध कानूनी उपायों की जानकारी उपलब्ध कराने तथा संबंधित अभिलेख एवं रजिस्टर अद्यतन रखने का निर्देश दिया गया।इसके बाद अधिकारियों ने पर्यवेक्षण गृह का भी विस्तृत निरीक्षण किया। विभिन्न वार्डों और परिसर का जायजा लेने के साथ वहां रह रहे किशोरों से बातचीत कर उनके भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, मनोरंजन, आवासीय व्यवस्था और अन्य आवश्यकताओं की जानकारी ली गयी।

पर्यवेक्षण गृह में स्वच्छता, भोजन और स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के निर्देश देते हुए किशोरों की नियमित स्वास्थ्य जांच और आवश्यकता के अनुसार समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने किशोरों के साथ संवेदनशील एवं सम्मानजनक व्यवहार करने तथा उनके पुनर्वास, शिक्षा, कौशल विकास और समाज की मुख्यधारा में पुनर्स्थापन की दिशा में निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता बतायी।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि केंद्रीय कारा एवं पर्यवेक्षण गृह में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के मानवीय अधिकारों, स्वास्थ्य, स्वच्छता और गरिमापूर्ण जीवन का विशेष ध्यान रखा जाये तथा शासन एवं न्यायालय द्वारा निर्धारित मानकों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाये।

निरीक्षण के दौरान दोनों संस्थानों में मूलभूत सुविधाओं, सुरक्षा, भोजन, स्वच्छता, चिकित्सा, अभिलेखों के संधारण, न्यायालय में पेशी और विधिक सहायता की समग्र स्थिति की समीक्षा की गयी। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया कि निःशुल्क विधिक सहायता की सुविधा प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक वास्तविक रूप से पहुंचे।

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