, July 31 -- अपने संबोधन में मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद केवल एक साहित्यकार नहीं, बल्कि भारतीय समाज के सजग चिंतक और युगद्रष्टा थे। उनके उपन्यासों और कहानियों में समाज की वास्तविकता, संघर्ष, मानवीय संवेदनाएँ तथा सामाजिक सरोकारों का जीवंत चित्रण मिलता है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को मुंशी प्रेमचंद के साहित्य से अवश्य जुड़ना चाहिए, क्योंकि उनकी रचनाएँ जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण, सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों की सीख देती हैं। उन्होंने प्रेमचंद की विभिन्न रचनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना अपने समय में था। अंत में उन्होंने मुंशी प्रेमचंद को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके अमूल्य साहित्यिक अवदान को स्मरण किया।इस अवसर पर श्रीमती रुबी निदेशक, सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, बिहार सरकार ने अपने संबोधन में मंत्री सहित सभी अतिथियों, कलाकारों एवं दर्शकों का स्वागत करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि 'कफ़न' मुंशी प्रेमचंद की अमर एवं कालजयी कृतियों में से एक है, जो आज भी समाज की विषमताओं, गरीबी और मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर प्रश्न उठाती है। उन्होंने कहा कि कला एवं संस्कृति विभाग का उद्देश्य ऐसी उत्कृष्ट साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय साहित्य, रंगमंच और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।

कार्यक्रम के अंत में बिहार संगीत नाटक अकादमी के सचिव महमूद आलम ने सभी अतिथियों, कलाकारों एवं दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुंशी प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक युवा को प्रेमचंद की रचनाओं का अध्ययन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि उनका साहित्य समाज की वास्तविकताओं से परिचित कराते हुए संवेदनशील, जागरूक और उत्तरदायी नागरिक बनने की प्रेरणा देता है।

नाटक 'कफ़न' में मणिकांत चौधरी ने घीसू, अविनाश कुमार ने माधव, सौरभ सिंह ने ठाकुर, अनामिका ने ठकुराइन, खुशबू ने बुधिया, राजीव दत्ता ने मंगल, भारती नारायण ने सुखिया, सृष्टि ने रूपा तथा परितोष कुमार ने दुकानदार की भूमिका का प्रभावशाली निर्वहन किया।

मंच-परे सहयोग में प्रकाश व्यवस्था का दायित्व विनय चौहान ने निभाया। अनुपमा प्रोडक्शन हेड तथा अनामिका प्रोडक्शन कंट्रोलर रहीं। प्रॉप्स का दायित्व समीर, गौतम निराला एवं पूजा, कॉस्ट्यूम का दायित्व अंजलि तिवारी एवं पूजा, सेट निर्माण का कार्य सुनील एवं काली राजा ने संभाला। नाटक का संगीत राजवीर गुंजन ने तैयार किया। कैमरा संचालन नीरज तथा मीडिया समन्वय रूपेश रंजन सिन्हा ने किया। रूप-सज्जा का कार्य अंजू एवं मयंक ने किया।

आयोजन में दीपक कुमार (अध्यक्ष, रंग गुरुकुल), रौशन कुमार, रागिनी एवं डॉ. जूली बनर्जी का महत्वपूर्ण सहयोग रहा, जबकि कार्यक्रम का संचालन शैलेश जयम्यार ने किया।यह संस्करण सरकारी प्रेस विज्ञप्ति की शैली, भाषा और प्रवाह के अधिक निकट है तथा प्रकाशन योग्य रूप में तैयार किया गया है।

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