, Aug. 17 -- कार्यक्रम को प्रो. उमेश कुमार भदानी, डॉ. कुणाल सिंह और डॉ. रजनीश कुमार- एनेस्थीसियोलॉजी; प्रो. राजीव नयन प्रियदर्शी- इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी तथा प्रो. रमेश कुमार-गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सहित विभिन्न विशेषज्ञों का सहयोग मिला।यह ट्रांसप्लांट सेंटर फॉर लिवर एंड बाइलरी साइंसेस की टीम के सहयोग से किया गया जिसका नेतृत्व प्रो. सुभाष गुप्ता ने किया।
ट्रांसप्लांट जैसी जटिल प्रक्रिया किसी एक विभाग या एक सर्जन की सफलता नहीं होती। इसके पीछे ट्रांसप्लांट सर्जन, हेपेटोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, नर्सिंग स्टाफ, तकनीशियन और ब्लड बैंक टीम का एकजुट प्रयास होता है।
एम्स पटना के लिवर ट्रांसप्लांट कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी सुलभ और किफायती उपचार की प्रतिबद्धता है।
शुरुआती पांच पात्र बीपीएल परिवारों के मरीजों को एम्स रिलीफ फंड के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। इससे लिवर ट्रांसप्लांट जैसे जटिल और महंगे उपचार का आर्थिक बोझ कम करने में मदद मिलेगी।
एम्स पटना में लिवर ट्रांसप्लांट कार्यक्रम की स्थापना और इसकी सफल शुरुआत कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल के दूरदर्शी नेतृत्व, मार्गदर्शन और संस्थागत प्रतिबद्धता का परिणाम है।
कार्यक्रम को नीलोत्पल बल, उप निदेशक (प्रशासन), एम्स पटना तथा प्रो. प्रशांत कुमार सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, एम्स पटना का महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं संस्थागत सहयोग मिला। इनके सहयोग से आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, प्रशासनिक समन्वय और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई।
एम्स पटना में पहली लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट की सफलता सिर्फ एक ऑपरेशन की सफलता नहीं है। यह बिहार के मरीजों के लिए एक नई उम्मीद की शुरुआत है।
अब लिवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए अत्याधुनिक ट्रांसप्लांट उपचार उनके अपने राज्य में उपलब्ध कराने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार हुआ है। इससे मरीजों और उनके परिवारों को जटिल इलाज के लिए दूसरे राज्यों के बड़े शहरों की ओर जाने की आवश्यकता को कम करने में मदद मिलेगी।
एम्स पटना का लक्ष्य है कि बिहार और पड़ोसी राज्यों के मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली, अत्याधुनिक, किफायती और मरीज-केंद्रित लिवर ट्रांसप्लांट सेवाएं अपने घर के करीब मिल सकें।
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