, Aug. 24 -- प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल, कार्यकारी निदेशक, एम्स पटना ने मॉक ड्रिल में शामिल सभी टीमों के समन्वित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि एम्स पटना आपदा और सामूहिक दुर्घटनाओं की स्थिति में त्वरित और प्रभावी चिकित्सा प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए अपनी तैयारियों और संस्थागत क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है।प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार ने कहा कि एम्स पटना भविष्य में भी नियमित रूप से फुल स्केल मॉक ड्रिल आयोजित करने की दिशा में काम करेगा। उन्होंने कहा कि बिहार के अलग अलग जिलों में इस तरह के अभ्यास आयोजित करने से आपदा चिकित्सा प्रतिक्रिया, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और मैदानी स्तर पर तैयारियों को और मजबूत किया जा सकेगा।
एम्स पटना ने डॉ. सी. बी. नारायण और एनडीआरएफ टीम, डॉ. रागिनी मिश्रा औरएचइओसी टीम, रोहतास जिला प्रशासन, पुलिस एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया एजेंसियों, अर्जुन फाउंडेशन के करीब 30 स्वयंसेवकों तथा एम्स पटना के सभी डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिक्स, प्रशासनिक, तकनीकी और सहयोगी कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
मॉक ड्रिल के क्लिनिकल और ऑपरेशनल सिमुलेशन में योगदान देने वाले एम्स पटना के सदस्यों में इरशाद, असुति, दीपिका राठौर, मोना कश्यप, लॉरेंस, इंद्रजीत, मोहन, संगीता ठाकुर, विकेश कुमार सिंह, अमित कुमार, कुंदन, राजा, दीपक और अर्जेश शामिल रहे। इनके साथ एम्स पटना की व्यापक क्लिनिकल, लॉजिस्टिक्स, प्रशासनिक और सपोर्ट टीमों ने भी अभ्यास को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह मेगा मॉक ड्रिल एक स्पष्ट संदेश लेकर आई कि आपदा आने के बाद तैयारी शुरू नहीं होती, तैयारी पहले से की जाती है। करमचट बाँध में हुए इस अभ्यास ने दिखाया कि सही योजना, त्वरित बचाव, व्यवस्थित ट्रायेज, मौके पर चिकित्सा सुविधा और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल से आपदा की घड़ी में अनमोल जिंदगियों को बचाने की क्षमता को और मजबूत किया जा सकता है।
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