, Sept. 22 -- कार्यक्रम में एम्स पटना के साथ-साथ इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, मेदांता तथा बिग अपोलो, पटना सहित विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।वैज्ञानिक सत्रों में अल्जाइमर रोग की व्यापकता एवं शरीर में इसकी पहचान करने वाले जैव संकेतक, स्मृतिभ्रंश से प्रभावित मस्तिष्क की कार्यप्रणाली, अल्जाइमर रोग की उत्पत्ति एवं विकास, उच्च मानसिक क्षमताओं का चिकित्सकीय उपयोग, स्मृतिभ्रंश से जुड़े व्यवहार एवं मनोवैज्ञानिक लक्षण तथा सामाजिक माध्यमों और स्मृतिभ्रंश जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान एवं विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि स्मृतिभ्रंश के बढ़ते मामलों को देखते हुए इसकी समय पर पहचान, उचित जांच और सही उपचार अत्यंत आवश्यक है।

प्रो. (डॉ.) ए. के. सिंह ने अल्जाइमर और स्मृतिभ्रंश से पीड़ित मरीजों में बीमारी की शुरुआती अवस्था में पहचान करने तथा उनके समुचित उपचार के लिए आधुनिक स्नायु रोग चिकित्सा सुविधाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. आनंद कुमार राय ने कहा कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित मरीजों को बेहतर और विशेष चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एक समर्पित 'उत्कृष्टता केंद्र' की स्थापना की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल चिकित्सकों के ज्ञान को अद्यतन करना ही नहीं था बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों के बीच स्मृतिभ्रंश के प्रति जागरूकता, शुरुआती लक्षणों की पहचान, समय पर चिकित्सकीय परामर्श और विभिन्न विशेषज्ञताओं के समन्वय से उपचार की समझ को भी मजबूत करना था।

इस कार्यक्रम ने विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर अपने अनुभव साझा करने, नई चिकित्सा पद्धतियों पर चर्चा करने और अल्जाइमर तथा स्मृतिभ्रंश से पीड़ित लोगों की बेहतर देखभाल के लिए विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि अल्जाइमर और स्मृतिभ्रंश से बेहतर ढंग से मुकाबला करने के लिए जागरूकता, शुरुआती पहचान, समय पर उपचार और समन्वित देखभाल सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं।

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