, July 27 -- तीन दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को हॉस्पिटल डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान, इंसिडेंट कमांड सिस्टम, ट्रायेज, क्षमता प्रबंधन, आपातकालीन संचार व्यवस्था, संसाधनों का बेहतर उपयोग, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय, निकासी (इवैक्यूएशन) योजना तथा आपदा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही सिमुलेशन आधारित अभ्यास, टेबलटॉप एक्सरसाइज और मॉक ड्रिल के माध्यम से वास्तविक परिस्थितियों में कार्य करने का अभ्यास भी कराया जाएगा।यह प्रशिक्षण प्रो. संजीव भोई, विभागाध्यक्ष, आपातकालीन चिकित्सा विभाग, जेपीएनएटीसी, एम्स नई दिल्ली के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण सत्रों का संचालन डॉ. श्रीशा नायक, फैकल्टी, जेपीएनएटीसी, एम्स नई दिल्ली द्वारा किया जा रहा है।

एम्स पटना की ओर से डॉ. अनिल कुमार, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, ट्रॉमा सर्जरी विभाग, डॉ. आरुणि राहुल तथा नर्सिंग विभाग के डीएनएस इरशाद खान सहित कई लोग शामिल हो रहे हैं।

कार्यक्रम का समन्वय डॉ. दिवेंदु भूषण, विभागाध्यक्ष, आपातकालीन चिकित्सा विभाग, एम्स पटना कर रहे हैं। इस अवसर पर एम्स पटना के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह तथा डीन (अकादमिक) प्रो. (डॉ.) पुनम प्रसाद भदानी भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल, कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ, एम्स पटना ने कहा कि आपदाएं कभी भी आ सकती हैं इसलिए अस्पतालों को हर समय तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक सुविधाओं के साथ साथ प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी, नियमित मॉक ड्रिल, स्पष्ट कार्ययोजना और बेहतर समन्वय किसी भी आपदा के दौरान प्रभावी उपचार और अधिक से अधिक लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विभिन्न संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, आपदा प्रबंधन की क्षमता बढ़ाने और बिहार में एक प्रशिक्षित एवं आपदा के लिए सदैव तैयार स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

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