, March 11 -- एम्स पटना के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीरज कुमार ने ए.आई. के नैदानिक प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह तकनीक चिकित्सकों को प्रारंभिक रोग पहचान, जोखिम आकलन तथा व्यक्तिगत उपचार योजना बनाने में सहायक हो सकती है। सत्र का प्रभावी संचालन डॉ. पल्लम गोपी चंद, उप-फैकल्टी इंचार्ज (आई.टी. एवं एच.आई.एस.), एम्स पटना ने किया।पैनल चर्चा के बाद सी-डैक के विशेषज्ञों द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
श्री जयेश दुबे, सी-डैक, ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के मूल सिद्धांतों और आधारभूत अवधारणाओं पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि मशीन लर्निंग मॉडल किस प्रकार बड़े पैमाने पर उपलब्ध स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण कर चिकित्सकीय निर्णय-निर्माण को अधिक प्रभावी बनाते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं के परिणामों को बेहतर बनाने में योगदान देते हैं।
चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि ए.आई. पहले से ही मेडिकल इमेजिंग विश्लेषण, गंभीर रोगियों की देखभाल में पूर्वानुमान विश्लेषण, रोगों की प्रारंभिक पहचान, दवा अनुसंधान तथा व्यक्तिगत चिकित्सा (पर्सनलाइज्ड मेडिसिन) जैसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को रूपांतरित कर रहा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इन तकनीकों के उपयोग के दौरान ए.आई. के नैतिक उपयोग, रोगी डेटा की गोपनीयता की सुरक्षा तथा राष्ट्रीय नियामकीय दिशानिर्देशों का पालन अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंत में फैकल्टी सदस्यों एवं रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ एक संवादात्मक चर्चा आयोजित की गई, जिसमें चिकित्सकों, डेटा वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच अंतरविषयी सहयोग के महत्व पर बल दिया गया।
प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि बदलते डिजिटल स्वास्थ्य परिदृश्य के अनुरूप भविष्य की पीढ़ी के स्वास्थ्य पेशेवरों को तैयार करने के लिए चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और क्लिनिकल प्रैक्टिस में ए.आई. का समावेश अत्यंत आवश्यक है।इस प्रकार की पहल के माध्यम से एम्स पटना डिजिटल स्वास्थ्य और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है, जिससे तकनीकी प्रगति का लाभ सीधे रोगी देखभाल और बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के रूप में प्राप्त हो सके।
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