, July 18 -- डॉक्टर चौधरी ने कहा कि यह गर्व की बात है कि मिथिला की धरती दरभंगा को इस राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी का अवसर मिला है।उन्होंने कहा कि "रेबीज एक ऐसी बीमारी है, जिसे समय पर टीकाकरण और जनजागरूकता के माध्यम से पूरी तरह रोका जा सकता है। इस वर्ष सम्मेलन की थीम 'वन हेल्थ अप्रोच: वैक्सीनेशन फॉर रेबीज एलिमिनेशन' अत्यंत प्रासंगिक है। मानव, पशु और पर्यावरण तीनों का स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है और इसी सोच के साथ हमें आगे बढ़ना होगा। बिहार सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने, टीकाकरण कार्यक्रमों के विस्तार तथा जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हमें विश्वास है कि चिकित्सकों, वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों और नीति-निर्माताओं के सामूहिक प्रयास से रेबीज उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को समय से पहले प्राप्त किया जा सकता है।डॉक्टर चौधरी ने कहा कि देशभर से आए सभी विशेषज्ञों का बिहार में स्वागत करता हूं और आशा करता हूं कि इस सम्मेलन में होने वाले विचार-विमर्श और शोध के निष्कर्ष समाज के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। हम सब मिलकर 'रेबीज मुक्त भारत' के संकल्प को साकार करने का प्रयास करें।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए एपक्रीकॉन संस्था के संस्थापक एवं मेंटर डॉ. एम.के. सुदर्शन ने कहा कि भारत को रेबीज मुक्त बनाने के लिए वैज्ञानिक रणनीति, व्यापक टीकाकरण और सामुदायिक सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मनुष्य और पशुओं दोनों के लिए समन्वित प्रयास ही स्थायी समाधान प्रदान कर सकते हैं।
डॉ. दुर्गा माधव सत्यापति ने कहा कि रेबीज नियंत्रण के लिए चिकित्सा, पशुपालन और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान तेज करने पर बल दिया।
डॉ. हेमंत कुमार गोहिल ने कहा कि आधुनिक टीकाकरण पद्धतियों और समयबद्ध उपचार के माध्यम से रेबीज से होने वाली मृत्यु को शून्य तक लाया जा सकता है। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों के नियमित प्रशिक्षण और नवीन वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. चितरंजन राय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह सम्मेलन रेबीज उन्मूलन के क्षेत्र में कार्य कर रहे विशेषज्ञों के लिए अनुभव साझा करने और नई रणनीतियां तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने बताया कि दो दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न वैज्ञानिक सत्र, शोध पत्रों की प्रस्तुति तथा विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देश के विभिन्न राज्यों से आए विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
उद्घाटन सत्र में रेबीज उन्मूलन के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, टीकाकरण की उपलब्धता, जनजागरूकता और 'वन हेल्थ' की अवधारणा को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। सम्मेलन के पहले दिन विभिन्न तकनीकी सत्रों में रेबीज की रोकथाम, नियंत्रण और उन्मूलन से जुड़े नवीनतम शोध एवं अनुभव प्रस्तुत किए गए।
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