, July 18 -- सम्मेलन के दौरान अतिथियों ने स्मारिका का विमोचन किया। दरभंगा मेडिकल कॉलेज के पीएसएम विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं सम्मेलन के आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. चित्तरंजन राय को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।वैज्ञानिक सत्र को संबोधित करते हुए मिशन रेबीज के निदेशक वरीय चिकित्सक डॉ. बालाजी चंद्रशेखर ने कहा कि रेबीज जानलेवा बीमारी है। मुख्यत: कुत्ते, बिल्ली और चमगादड़ इसके मुख्य वाहक होते हैं। देश में लगभग 96 प्रतिशत मामले अवारा कुत्तों के काटने की वजह से सामने आते हैं। समय पर वैक्सीन लेने से ही इस बीमारी की चपेट में आने से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि रेबीज होने पर बचना मुश्किल है। ये 100 प्रतिशत घातक बीमारी है। लोगों के बीच जागरूकता फैलाकर ही रेबीज को समाप्त किया जा सकता है।
एम्स, दिल्ली, आईजीआईएस, पटना सहित अन्य जगहों से आए कई चिकित्सकों ने कहा कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य लोगों के अलावा डॉक्टरों के बीच भी रेबीज को लेकर जागरूकता फैलाना है। रेबीज मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों के काटने या खंरोचने से फैलता है। इंसान में लक्षण दिखने के बाद ये सौ फीसदी घातक होता है। समय पर इलाज और टीकाकरण से ही इसे पूरी तरह रोक जा सकता है।
वक्ताओं ने कहा कि रेबीज वायरस संक्रमित जानवरों की लार में मौजूद रहता है। काटने के अलावा किसी खुले घाव के संपर्क में संक्रमित लार के आने से रेबीज का खतरा उत्पन्न हो जाता है।
वक्ताओं ने कहा कि जानवरों के काटने पर बहते हुए पानी में घाव पर साबुन लगाकर उसे कम से कम 15 मिनट तक धोएं। घाव पर एंटीसेप्टिक लगाएं। इसके बाद अविलंब एंटी रेबीज वैक्सीन लें। घाव अगर गहरा हो या चेहरे व गर्दन पर हो, तो रेबीज इम्युनोग्लिबिन लेना भी जरूरी है। पालतू कुत्ते और बिल्ली को नियमित रूप से वैक्सीन दिलाना अति आवश्यक है।
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