, July 26 -- भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एवं बिहार पुलिस के पूर्व उप महानिरीक्षक सह फोरम फॉर पीस एंड जस्टिस के अध्यक्ष मोहम्मद अब्दुल्लाह ने कहा कि समाज में स्थायी शांति और न्याय की स्थापना केवल कानून के सहारे संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी निभानी होगी।उन्होंने कहा कि आज समाज जाति, धर्म, भाषा और संकीर्ण विचारधाराओं के आधार पर विभाजित होता जा रहा है। ऐसे समय में संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक सद्भाव और मानवता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ अन्याय, हिंसा अथवा उत्पीड़न होता है तो समाज के लोगों को मूकदर्शक बनने के बजाय पीड़ित के साथ खड़ा होना चाहिए। न्याय केवल न्यायालयों का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जब नागरिक अन्याय के विरुद्ध निर्भीक होकर आवाज उठाएंगे, तभी लोकतंत्र मजबूत होगा और समाज में विश्वास, सुरक्षा तथा शांति का वातावरण बनेगा।संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राणा रणजीत सिंह ने संस्कृत के "वसुधैव कुटुम्बकम्" और उर्दू की मोहब्बत एवं इंसानियत की परंपरा को समाज को जोड़ने वाला सूत्र बताया।

वहीं बुशरा फातमा ने कहा कि फोरम फॉर पीस एंड जस्टिस अन्याय के शिकार लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोहम्मद इमामुल हक इमाम ने किया, जबकि अतिथियों का स्वागत समाजसेवी संतोष सिंह और मोजम्मिल रज़ा आज़मी ने किया।

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