, Sept. 23 -- इस दौरान स्वचालन, डिजिटलीकरण, गुणवत्ता, सुरक्षा एवं उत्पादकता जैसे क्षेत्रों के बढ़ते महत्व पर भी चर्चा की गई।प्रशिक्षुओं को अप्रेंटिसशिप को उद्योग के वास्तविक वातावरण में सीखने, कार्यस्थल की कार्यप्रणाली को समझने तथा अपने तकनीकी कौशल को मजबूत करने के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही अनुशासन, संचार कौशल, टीमवर्क, समस्या समाधान की क्षमता, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति एवं सकारात्मक कार्य व्यवहार को सफल करियर के लिए आवश्यक बताया गया।
कार्यशाला में मशीन एवं उपकरणों के सुरक्षित उपयोग, गुणवत्ता मानकों तथा कार्यस्थल के नियमों के पालन पर विशेष जोर दिया गया। प्रशिक्षुओं को साक्षात्कार की तैयारी, नियुक्ति प्रक्रिया तथा उद्योग की अपेक्षाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी भी दी गई। उन्हें रोजगार को केवल नौकरी के रूप में नहीं, बल्कि दीर्घकालिक करियर की शुरुआत के अवसर के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया गया।
राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, हाजीपुर के प्राचार्य ने कहा कि उद्योग के अनुभवी विशेषज्ञों से सीधे संवाद का अवसर प्रशिक्षुओं के लिए अत्यंत उपयोगी है। इससे उन्हें संस्थान में सीखे गए कौशल के वास्तविक कार्यस्थल पर उपयोग तथा उद्योग की अपेक्षाओं को समझने में मदद मिलती है। ऐसे संवाद प्रशिक्षुओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उन्हें रोजगार एवं भविष्य के करियर के लिए बेहतर ढंग से तैयार करने में सहायक हैं।
कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में प्रशिक्षुओं एवं प्रशिक्षकों ने उद्योग में कार्य करने, आवश्यक कौशल, अप्रेंटिसशिप, नियुक्ति प्रक्रिया एवं करियर के अवसरों से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे। विशेषज्ञ द्वारा दिए गए व्यावहारिक सुझावों से प्रतिभागियों को आईटीआई प्रशिक्षण के बाद उपलब्ध रोजगार अवसरों तथा कार्यस्थल की आवश्यक तैयारियों को समझने में सहायता मिली।
जिला पदाधिकारी के मार्गदर्शन में आयोजित यह पहल तकनीकी प्रशिक्षण, उद्योग की जरूरतों और युवाओं के रोजगार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे आईटीआई प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण के साथ-साथ उद्योग की वास्तविक अपेक्षाओं को समझने और अपने कौशल को रोजगारपरक बनाने का अवसर मिला।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित