, May 15 -- आईजी (साइबर) रणजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि सर्वाधिक ऑनलाइन शिकायत और एफआईआर दर्ज करने में बिहार का स्थान देश में चौथा है। राज्य में साइबर अपराध में संलिप्त 1200 म्यूल बैंक खातों को चिन्हित कर बंद करा दिया गया है। इसमें 122 एफआईआर दर्ज की गई है। फर्जी दस्तावेज की मदद से खोले गए इन खातों का उपयोग साइबर अपराध में ठगी गई राशि के लेन-देन के लिए प्रयोग किया जाता था। इसमें संलिप्त पाए गए पांच बैंक कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि राज्यभर में 199 करोड़ रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी के मामले सामने आ चुके हैं। इसमें 51 करोड़ 84 लाख रुपये को होल्ड कराया जा चुका है, जो कुल राशि का 26.04 प्रतिशत है। इसमें 7 करोड़ 6 लाख रुपये होल्ड कराए गए हैं।

श्री मिश्रा ने बताया कि साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर आने वाली कॉल की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। इस वर्ष फरवरी तक रोजाना 5500 फोन कॉल आते थे, इसके बाद यह संख्या बढ़कर 8100 कॉल प्रतिदिन के औसत से हो गई है। उन्होंने बताया कि जनवरी से अप्रैल तक नौ लाख से अधिक कॉल का उत्तर दिया गया, जो कुल आए कॉल का 99 फीसदी है। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में दर्ज शिकायतों की संख्या 59 हजार 579 है। इस दौरान 602 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी भी की गई है।

श्री मिश्रा ने बताया कि पिछले वर्ष 2025 में 1098 अपराधियों की गिरफ्तारी हुई थी। साइबर अपराध पर नकेल कसने के लिए साइबर प्रहरार 2.0 अभियान चलाया गया है। साइबर अपराध में शामिल 4 हजार 147 मोबाइल नंबर और 638 मोबाइल फोन के आईएमईआई नंबर को ब्लॉक कराया जा चुका है। इसके अलावा फर्जी या गलत दस्तावेज पर सिम बेचकर इसे चालू कराने वाले 162 पीओएस एजेंट को भी चिन्हित कर कार्रवाई की गई है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित