, May 4 -- श्रीमती भारती ने कहा कि दलित स्त्रीवाद अपनी प्रकृति में समावेशी और उदार है, जो एक समतामूलक समाज के निर्माण की दिशा में मार्ग प्रशस्त करता है। व्याख्यान के दौरान उन्होंने सैद्धांतिक पहलुओं के साथ-साथ अपने निजी अनुभव भी साझा किए, जिससे विषय और अधिक जीवंत हो उठा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार ने की। अपने स्वागत वक्तव्य में उन्होंने कहा कि दलित साहित्य एक समतामूलक समाज की वैचारिक नींव तैयार करता है और अनीता भारती इस क्षेत्र की प्रमुख हस्ताक्षर हैं।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. मंजरी खरे ने किया। व्याख्यान के उपरांत प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ, जिसमें शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं ने जाति, मानसिक स्वास्थ्य, पितृसत्ता और दलित स्त्री लेखन से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका अनीता भारती ने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया।

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