, March 6 -- इस अवसर पर बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अपने संबोधन में वीर कुँवर सिंह की वीरता का स्मरण करते हुए कहा, "80 बरस की उमर में जागा जोश पुराना था,सब कहते हैं बाबू कुँवर सिंह बड़ा वीर मर्दाना था।"उन्होंने कहा कि यह पंक्तियाँ वीर कुँवर सिंह के अदम्य साहस और देशभक्ति को दर्शाती हैं। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान वीर कुँवर सिंह के जीवन से जुड़ी कई रोचक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों की गाथाएँ आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि यह नाट्य प्रस्तुति उन वीरों की शौर्यगाथा को सामने लाती है जिन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे सहित कई वीरों ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया, लेकिन बाबू वीर कुँवर सिंह ऐसे महान योद्धा थे जिन्होंने अंतिम समय तक अंग्रेजों के सामने घुटने नहीं टेके।उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम की इस शौर्यगाथा में विभिन्न जाति और धर्म के लोगों ने मिलकर देश की आजादी के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया, जो हमारी राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। उन्होंने कला एवं संस्कृति विभाग की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि विभाग द्वारा हाल के दिनों में जिस सक्रियता और तत्परता के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, वह अत्यंत सराहनीय है।
कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने कहा कि यह नाटक बाबू वीर कुँवर सिंह की देशभक्ति और बलिदान की भावना को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। उन्होंने उपस्थित सभी कला प्रेमियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे नाट्य आयोजनों के माध्यम से राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समाज के समक्ष लाने का कार्य किया जा रहा है।
इस अवसर पर श्रीमती रूबी, निदेशक, सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, कृष्ण कुमार, निदेशक, संग्रहालय तथा महमूद आलम, सचिव, बिहार संगीत नाटक अकादमी, पटना की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
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