, May 30 -- पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने निर्देश दिए कि सर्वेक्षण में चिन्हित अस्थायी संरचनाओं को स्थानीय थाना के सहयोग से तत्काल हटाया जाए, जबकि ढाबों एवं अन्य स्थायी व्यावसायिक संरचनाओं के संचालकों को पहले नोटिस देकर निर्धारित समय सीमा प्रदान की जाए। समयसीमा के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाने पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक में दुर्घटना संभावित स्थलों (ब्लैक स्पॉट) की पहचान कर वहां रोड सेफ्टी फीचर्स विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
जिलाधिकारी ने एनएचएआई के फील्ड अधिकारियों को प्रत्येक माह राष्ट्रीय राजमार्गों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया। वहीं जिला परिवहन पदाधिकारी को एनएचएआई के सभी डिवीजनों के साथ समन्वय स्थापित कर हाईवे सेफ्टी जोन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। बैठक में राष्ट्रीय राजमार्गों पर त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए एंबुलेंस सेवा बढ़ाने का मुद्दा भी उठाया गया।
उल्लेखनीय है कि पूर्वी चंपारण देश के उन 100 जिलों में शामिल है, जहां सड़क दुर्घटनाओं की संख्या सर्वाधिक है। जिले में औसतन हर दो दिन में तीन लोगों की सड़क हादसों में मौत हो जाती है। वर्ष 2017 से 2025 के बीच महज नौ वर्षों में जिले में 3,978 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 3,192 लोगों की जान चली गई जबकि 2,290 लोग घायल हुए। इन चिंताजनक आंकड़ों को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई यह पहल सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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