रायपुर/बिलासपुर , जुलाई 17 -- छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने करीब दो दशक बाद बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। शहर के अधिकांश निचले इलाकों में जलभराव होने से जनजीवन प्रभावित है।
सरकंडा और चांटीडीह क्षेत्र से 40 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि दोमुहानी इलाके में 10 से अधिक मकान पानी से घिरकर टापू बन गए हैं। कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर डूबने से बिजली आपूर्ति बाधित है और शुक्रवार को जिले के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है।
लगातार बारिश के कारण दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मंडल में रेलवे ट्रैक और यार्ड में पानी भर गया, जिससे रेल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से पांच मेमू ट्रेनों का परिचालन निरस्त कर दिया है तथा तीन ट्रेनों का संचालन आंशिक रूप से किया जा रहा है।
रद्द की गई ट्रेनों में ट्रेन नंबर 68734 बिलासपुर-कोरबा मेमू, 68733 कोरबा-बिलासपुर मेमू, 68719 बिलासपुर-रायपुर मेमू, 68746 रायपुर-बिलासपुर मेमू तथा 68745 बिलासपुर-रायपुर मेमू शामिल हैं। वहीं 68735 रायगढ़-बिलासपुर मेमू को चांपा स्टेशन पर समाप्त किया गया है, 68738 बिलासपुर-रायगढ़ मेमू अब चांपा से रायगढ़ के लिए रवाना होगी तथा 68728 रायपुर-बिलासपुर मेमू को दाधापारा स्टेशन से वापस रायपुर भेजा गया है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार बिलासपुर स्टेशन और यार्ड में ट्रैक पर जलभराव होने के कारण यह निर्णय लिया गया है। अधिकारियों ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ट्रैक सामान्य होने के बाद ही नियमित परिचालन बहाल किया जाएगा।
गुरुवार दोपहर से शुरू हुई बारिश रातभर जारी रही, जिससे शहर की प्रमुख सड़कें, कॉलोनियां और निचले इलाके जलमग्न हो गए। कई स्थानों पर सड़क और नाले का अंतर समाप्त हो गया, जिससे आवागमन बाधित रहा। शहर के अनेक हिस्सों में बिजली गुल होने से पेयजल संकट भी गहरा गया है। कई ट्रांसफार्मर पानी में डूब गए हैं।
बारिश का असर जिला प्रशासन पर भी पड़ा है। कलेक्टर के सरकारी बंगले में भी पानी भर गया, जहां नगर निगम की टीम जल निकासी में लगी हुई है। दूसरी ओर, सरकंडा के बंधवापारा सहित विभिन्न इलाकों में एसडीआरएफ ने नावों के माध्यम से राहत एवं बचाव अभियान चलाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
तेज बारिश के बीच अरपा चेक डैम की नहर मानिकपुर के पास टूट जाने से देवरीखुर्द, मानिकपुर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में पानी फैल गया। कई मकान जलमग्न हो गए और लोगों में दहशत का माहौल है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी कर राहत एवं बचाव कार्य में जुटा हुआ है।
दोमुहानी क्षेत्र में बाढ़ का पानी भरने से 10 से अधिक घर चारों ओर से पानी से घिर गए हैं। कई परिवार, जिनमें छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं, रातभर घरों में फंसे रहे और राहत दल की प्रतीक्षा करते रहे। बढ़ते जलस्तर के कारण क्षेत्र में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटे में जिले में औसतन 74.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई। सर्वाधिक 110.2 मिमी वर्षा सीपत में रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा मस्तूरी 96.2 मिमी, सकरी 95.4 मिमी, बिलासपुर तहसील 90.0 मिमी, तखतपुर 83.4 मिमी, रतनपुर 80.4 मिमी, पचपेड़ी 72.5 मिमी, बोदरी 67.3 मिमी, बिल्हा 67.0 मिमी, कोटा 47.2 मिमी, बेलतरा 46.0 मिमी तथा बेलगहना 41.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार एक जून से अब तक जिले में 325.1 मिमी औसत वर्षा हो चुकी है, जो पिछले दस वर्षों के औसत का 92.4 प्रतिशत है। प्रशासन ने निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने तथा जलभराव वाले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की है।
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