रायपुर , जुलाई 14 -- छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बिलासपुर स्थित प्लेस ऑफ सेफ्टी (विशेष गृह) से चार विधि-विरुद्ध बालकों के चौकीदार की हत्या कर फरार होने की घटना पर तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा, फरार बालकों की शीघ्र तलाश तथा संस्थागत व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए हैं।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने सोमवार को इस मामले में ऑनलाइन समीक्षा बैठक की, जिसकी जानकारी आज सुबह दी गई । बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ), जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ), विशेष किशोर पुलिस इकाई (एसजेपीयू), प्लेस ऑफ सेफ्टी के अधीक्षक सहित अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हुए।
आयोग ने बताया कि छह दिसंबर 2025 को डॉ. शर्मा ने बिलासपुर स्थित प्लेस ऑफ सेफ्टी का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान पेयजल, भोजन व्यवस्था, स्टाफ की कमी, सुरक्षा प्रबंधन, काउंसलिंग तथा पुनर्वास व्यवस्था से जुड़ी कमियां सामने आने पर संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
तेरह जुलाई को हुई घटना के बाद आयोजित समीक्षा बैठक में आयोग ने पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की स्थिति की समीक्षा की और सुरक्षा व्यवस्था का पुनर्मूल्यांकन कर आवश्यक सुधार तत्काल सुनिश्चित करने को कहा।
आयोग ने एसजेपीयू अधिकारी रश्मीत कौर को निर्देश दिए कि फरार चारों विधि-विरुद्ध बालकों की उपलब्ध जानकारी एकत्र कर उनके संभावित ठिकानों और संपर्क सूत्रों के आधार पर संबंधित विभागों के समन्वय से विशेष खोज अभियान चलाया जाए।
साथ ही जेजेबी सदस्य कुंती, जिला कार्यक्रम अधिकारी तथा जिला बाल संरक्षण अधिकारी को निर्देश दिए गए कि ऐसे गंभीर मामलों की जानकारी शासन को केवल मौखिक रूप से नहीं, बल्कि विधिवत लिखित प्रतिवेदन के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जाए। आयोग ने स्पष्ट किया कि दूरभाष से सूचना देने के बाद भी विस्तृत लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
आयोग ने संबंधित अधिकारियों से पृथक रूप से विस्तृत प्रतिवेदन भी मांगा है। इसमें संस्था की स्वीकृत क्षमता, वर्तमान में रह रहे बच्चों की संख्या, उपलब्ध काउंसलरों की संख्या एवं योग्यता, काउंसलिंग व्यवस्था, सुरक्षा उपायों में किए गए सुधार, घटना के संबंध में की गई कार्रवाई तथा भविष्य की कार्ययोजना का तथ्यात्मक विवरण शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. शर्मा ने निर्देश दिए कि प्रत्येक प्रकरण में बच्चों की मानसिक स्थिति और मनोसामाजिक आवश्यकताओं का गंभीरता से आकलन किया जाए तथा आवश्यकता के अनुरूप काउंसलिंग एवं पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने कहा कि प्रकरण की जांच, फरार बालकों की तलाश, सुरक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण और पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की नियमित समीक्षा की जाएगी। आयोग बच्चों के अधिकारों और संरक्षण से जुड़े इस प्रकरण का सतत अनुश्रवण करते हुए आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई और अनुशंसाएं करेगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित