तेहरान , जून 19 -- ईरानी नैतिक पुलिस की तरफ से अनिवार्य किये गये हिजाब के बिना प्रस्तुति देने के लिए एक 29 वर्षीय ईरानी गायिका को 74 कोड़ों की सजा सुनायी गयी है। परस्तू अहमदी और एक प्रोडक्शन टीम के आठ सदस्यों ने 2024 में अहमदी के यूट्यूब चैनल पर लाइव-स्ट्रीम किये गये एक संगीत संध्या में प्रस्तुति दी थी। उन्होंने एक ऐतिहासिक देशभक्ति गीत 'अज़ खून-ए जवानान-ए वतन' ('वतन के युवाओं के खून से') गाया था और इस 'कारवांसेराय कॉन्सर्ट' का वीडियो तब से वायरल हो गया है।
अधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, कोम प्रांत की एक आपराधिक अदालत ने उन्हें और कई संगीतकारों को कोड़े मारने, देश छोड़ने पर और कलात्मक गतिविधियों में शामिल होने पर दो वर्ष के प्रतिबंध की सजा सुनायी है।
न्यायपालिका की आधिकारिक समाचार एजेंसी का यह फैसला अभी प्रकाशित किया जाना बाकी है। वकीलों और मानवाधिकार समूहों के अनुसार, अदालत के दस्तावेजों में हालांकि कहा गया है कि आरोपों में इंटरनेट पर 'अश्लील और अनैतिक सामग्री' बनाने तथा उसे प्रकाशित करने के माध्यम से सार्वजनिक शालीनता को ठेस पहुंचाना शामिल है।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि अहमदी को दी गयी यह सजा इस बात का सबूत है कि ईरान में स्थिति बदली नहीं है।
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