नैनीताल , जुलाई 28 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हरिद्वार जिले की तहसील रुड़की के ग्राम मलकपुर और लतीफपुर में भूमि का अधिग्रहण किये बिना पुल निर्माण के मामले में मंगलवार को सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी हरिद्वार को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ताओं के 31 मई 2026 को दिए गए प्रत्यावेदन पर नौ माह के अंदर निर्णय लें।

मामले की सुनवाई वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में हुई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्यावेदन पर निर्णय लेते समय संबंधित पक्षकारों को सुनवाई का अवसर दिया जाए।

मामले के अनुसार ग्राम मलकपुर और लतीफपुर निवासी संजीव कुमार एवं अन्य ने याचिका दायर कर कहा कि राज्य सरकार द्वारा उनकी भूमि का अधिग्रहण किए बिना तथा मुआवजा दिए बिना उस पर पुल का निर्माण कराया जा रहा है, जो नियमों के विपरीत है।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार उक्त भूमि जलमग्न क्षेत्र में है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1975 में भी इसी क्षेत्र में एक अन्य पुल का निर्माण किया गया था और उस समय भूमि के लिए उन्हें मुआवजा दिया गया था लेकिन वर्तमान पुल के निर्माण के लिए न तो उनकी भूमि का अधिग्रहण किया गया और न ही उन्हें मुआवजा दिया गया। इस संबंध में उन्होंने प्रशासन और राज्य सरकार के समक्ष प्रत्यावेदन भी दिया लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि वर्तमान पुल का निर्माण दूसरी जगह किया जा रहा है, इसलिए भूमि अधिग्रहण करने और मुआवजा देने की जरूरत नहीं है।

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