बारां , जुलाई 21 -- राजस्थान में बारां शहर सहित जिले के विभिन्न कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्कूल बसें, वैन और ऑटो बिना वैध परमिट, फिटनेस, बीमा और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के संचालित हो रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिम्मेदार विभागों की आंखों के सामने नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। ऐसे में हर दिन सैकड़ों बच्चों की जिंदगी जोखिम में डालकर स्कूल वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं।

शनिवार को केलवाड़ा स्थित वीर तेजा स्कूल की बस का मामला सामने आने के बाद स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े हो गये हैं। जानकारी के अनुसार बस से लगातार धुआं निकल रहा था और डीजल और तेल का रिसाव हो रहा था। इसके बावजूद बस में बच्चों को बैठाकर सड़क पर चलाया जा रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे वाहन में तकनीकी खराबी या आग लगने जैसी घटना हो जाये तो बड़ा हादसा हो सकता है।

इससे पहले भी स्कूल वाहनों में अनियमितताओं के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों द्वारा सख्ती नहीं बरते जाने से हालात जस के तस बने हुए हैं।

स्कूल वाहनों में वैध परमिट, फिटनेस प्रमाण-पत्र, बीमा, गति संचालक गति नियंत्रक, अग्निशमन यंत्र, प्राथमिक उपचार किट, आपातकालीन निकास और प्रशिक्षित चालक-परिचालक की व्यवस्था अनिवार्य है। इसके बावजूद जिले में कई वाहन इन मानकों पर खरे नहीं उतर रहे। कई जगह क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर परिवहन किया जा रहा है।

अभिभावकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि स्कूल वाहन बिना आवश्यक दस्तावेजों और सुरक्षा मानकों के संचालित हो रहे हैं, तो इसकी जिम्मेदारी केवल स्कूल प्रबंधन की नहीं, बल्कि परिवहन विभाग, शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की भी है। सवाल यह है कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित जांच अभियान क्यों नहीं चलाये जा रहे?लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद अभिभावकों में चिंता बढ़ गयी है। उनका कहना है कि वे बच्चों को शिक्षा के लिए स्कूल भेजते हैं, सुविधाएं मुहैया कराते हैं, लेकिन रास्ते में उनकी सुरक्षा को लेकर हमेशा डर बना रहता है। समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से जिलेभर में विशेष अभियान चलाकर सभी स्कूल वाहनों की जांच कराने और बिना परमिट, बीमा, फिटनेस और लाइसेंस वाले वाहनों को तत्काल जब्त करने की मांग की है। साथ ही बच्चों की सुरक्षा से समझौता करने वाले स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है।

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