नैनीताल , सितंबर 11 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हरिद्वार जिले की झबरेड़ा के अलावा अन्य क्षेत्रों में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति के बिना संचालित हो रहे 230 से अधिक कोल्हू इकाइयों में प्लास्टिक, रबर और पुराने टायरों के उपयोग के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में इस मामले पर सुनवाई हुई। झबरेड़ा निवासी विकास सैनी की ओर से अदालत को बताया गया कि झबरेड़ा नगर पंचायत ही 200 से अधिक कोल्हू संचालित हो रहे हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार इन इकाइयों के संचालक भट्ठी जलाने के लिए प्लास्टिक, पुराने टायर एवं अन्य विषैले पदार्थों का उपयोग कर रहे हैं, जिसका स्कूली बच्चों, आम लोगों तथा पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। याचिका में यह भी बताया गया कि कई इकाइयां आबादी वाले क्षेत्रों, स्कूलों, अस्पतालों और पेट्रोल पंपों के आसपास स्थापित हैं, इसलिए इनके संचालन पर रोक लगाई जाए।
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